*आग्रह*

ये सर्दी का मौसम,
ये कोहरे का नज़ारा
आज है ये आग्रह हमारा
कोहरे में डूबी,
यह सुन्दर-सुन्दर सुबह
जी भर के जी लें,
आओ ना एक कप चाय,
क्यूं ना साथ-साथ पी लें..
_____✍️गीता


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6 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 12, 2021, 12:25 pm

    अतिसुंदर भाव

  2. Rishi Kumar - January 12, 2021, 8:41 pm

    बहुत सुंदर भाव

  3. Satish Pandey - January 12, 2021, 10:36 pm

    कवि गीता जी की यह कविता ठंडे मौसम के रंग से सरोबार होकर परवान चढ़ी है। कविता में अति सुन्दर शिल्पगत सौंदर्य है।

    • Geeta kumari - January 13, 2021, 10:06 am

      इस सुन्दर समीक्षा और प्रेरणा देती हुई समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी।

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