इंतज़ार

इंतज़ार झिलमिलाता रहा
रातभर आंखों में!
तुम नहीं
तुम्हारा पैग़ाम आया
‘आज न सही, कल की बात रही’।

चलो मान लेते हैं;
एक और झूठ
तुम्हारे नाम पर जी लेते हैं


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4 Comments

  1. Kanchan Dwivedi - March 23, 2020, 8:46 pm

    Good one

  2. Pragya Shukla - March 24, 2020, 12:02 am

    Nice

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - March 24, 2020, 8:12 am

    Nice

  4. Dhruv kumar - March 26, 2020, 10:39 am

    Nyc

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