“इशारा”

हर बाब बन्द और दरीचे खुलीं थीं घर की इशारा इस ओर था,
कोई चोरी छुपे ही सहीं झरोखों से मगर इन्तजार में राहें निहार रहा था,

Related Articles

यादें

बेवजह, बेसबब सी खुशी जाने क्यों थीं? चुपके से यादें मेरे दिल में समायीं थीं, अकेले नहीं, काफ़िला संग लाईं थीं, मेरे साथ दोस्ती निभाने…

फोन चोरी हुआ

कविता- फोन चोरी हुआ ——————————– सुनो भाई, कब तक गुजारोगे, जीवन में चोरी करके, मेरा या गैरों का- फोन चुरा करके, इस काम से क्या…

Responses

New Report

Close