ओस

ओस की नयना शोभे तन पर,
हवा वंसती मोहे मुझको ।
हरियाली तेरे बदन की सजनी,
खुशियों की आभा बनकर बुलाये मुझको।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी


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4 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 17, 2020, 10:56 pm

    Nice

  2. Pragya Shukla - June 18, 2020, 10:18 am

    👏👏

  3. Abhishek kumar - July 10, 2020, 11:53 pm

    👏👏

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