ओस

ओस की नयना शोभे तन पर,
हवा वंसती मोहे मुझको ।
हरियाली तेरे बदन की सजनी,
खुशियों की आभा बनकर बुलाये मुझको।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

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