कमाल है..

***ये तो कमाल ही है***
सहेली, नहीं है किस्मत
फ़िर भी रूठ जाती है
पहेली,नहीं है बुद्धि,
फ़िर भी उलझ जाती है
आत्म-सम्मान, नहीं है बदन
फ़िर भी चोट खाता है
और इंसान, नहीं है मौसम
फ़िर भी देखो ना ,बदल जाता है..

*****✍️ गीता


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4 Comments

  1. Pragya Shukla - October 21, 2020, 3:19 pm

    सुंदरतम् रचना..

    • Geeta kumari - October 21, 2020, 3:27 pm

      बहुत सारा धन्यवाद प्रज्ञा बहन…सुस्वागतम् 💐

  2. MS Lohaghat - October 21, 2020, 4:43 pm

    बहुत बढ़िया वाह

    • Geeta kumari - October 21, 2020, 4:51 pm

      सादर धन्यवाद सर बहुत बहुत आभार 🙏

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