करवा-चौथ विषेश

ऐ चाँद तू आज भाव खाना नहीं।
मेरे चाँद को तू आज सताना नहीं।

बैठी पलकें बिछाए,
तेरा दीदार हो जाए,
तेरे इंतज़ार की घड़ी बढ़ाना नहीं।
ऐ चाँद तू आज भाव खाना नहीं।
मेरे चाँद को तू आज सताना नहीं।

बगैर आबो-दाना,
मुश्किल दिन बिताना,
मकसद मेरा, तुझे बताना नहीं।
ऐ चाँद तू आज भाव खाना नहीं।
मेरे चाँद को तू आज सताना नहीं।

मेरी लंबी उम्र का जिक्र है,
मुझे मेरे चाँद की फिक्र है,
मंज़ूर मुझे बादलों का बहाना नहीं।
ऐ चाँद तू आज भाव खाना नहीं।
मेरे चाँद को तू आज सताना नहीं।

देवेश साखरे ‘देव’

आबो-दाना – अन्न और जल

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12 Comments

  1. Poonam singh - October 17, 2019, 6:36 pm

    Bahut khub

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - October 17, 2019, 7:18 pm

    वाह बहुत सुंदर

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 17, 2019, 8:09 pm

    अतिसुंदर भाव

  4. nitu kandera - October 17, 2019, 10:36 pm

    Good

  5. NIMISHA SINGHAL - October 19, 2019, 9:46 pm

    सुंदर रचना

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