कालेज का पहला दिन

कविता- कालेज का पहला दिन
—————————————–
कालेज का,
पहला दिन,
एक अनजाने से ,
पहचान हुई,
पता नहीं था ,
उसके बारे में-
फिर भी दिल के,
पास हुई,
दिल का धड़कना,
बढ़ गया मेरे,
जब उसकी नजरें,
मेरे चेहरे पर हुई|
झूठ हसी-
हसता चेहरा बनाया,
डरता था मन ही मन,
कहीं कुछ बोल न दे,
मै घायल हुआ-
जब उसने,
चेहरे पर मुस्कान दिखाया,
मै सरमाया वो सरमाई,
झट हमने नजर हटाया|
फिर जाते अपनी अपनी कक्षा में,
“ऋषि” ढ़ुढ़े दोपहर कि छुट्टी मे,
कभी इस कमरे से उस कमरे तक,
ढुढ़ रहा हूँ-
खड़े खड़े कालेज के प्रागंण में|
——————————————
***✍ऋषि कुमार “प्रभाकर”——

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

New Report

Close