कोमल सी दूब हो

राहों में आपके
कोमल सी दूब हो,
पाने का हो जुनून मन में
उमंग खूब हो।
आ जायें जब कभी
मायूसियों के दिन
कुहरे के बीच भी
थोड़ी सी धूप हो।
मन साफ हो दिखे वो
सच में हो सच की छाया
भीतर वही भरा हो
बाहर जो रूप हो।
हर ओर हो उमंगें
उल्लास का सफर हो
मन सब तरफ रमा हो
बिल्कुल न ऊब हो।


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9 Comments

  1. Piyush Joshi - February 17, 2021, 11:12 pm

    अति सुन्दर कविता

  2. Devi Kamla - February 18, 2021, 8:05 am

    उत्तम लेखन

  3. Geeta kumari - February 18, 2021, 9:36 am

    बहुत ख़ूब, सुंदर शिल्प एवम् सुन्दर भाव लिए हुए अति सुन्दर कविता, अति उत्तम प्रस्तुति

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 19, 2021, 5:57 pm

    बहुत खूब

  5. Seema Chaudhary - March 9, 2021, 11:35 am

    बहुत सुंदर

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