क्या नया है इस जीवन।

क्या नया है इस जीवन में,
वही रोज की शाम सुबह है।
जब हम थक जाते हैं,
फिर उम्मीद के झरोखों से,
झाकते हैं।
बदल जाता है वह सब कुछ,
हर सुबह न‌ई-सी लगती है,
और हर रात-सी न‌ई लगती।


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12 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 20, 2020, 1:34 pm

    बहुत खूब

  2. Suman Kumari - September 20, 2020, 4:46 pm

    बहुत ही उम्दा

  3. Pragya Shukla - September 20, 2020, 7:44 pm

    True

  4. मोहन सिंह मानुष - September 22, 2020, 1:20 pm

    बहुत सुंदर पंक्तियां

  5. Deep Patel - September 22, 2020, 7:25 pm

    फिर सुबह एक नई रोशन हुई,
    फिर उम्मीदें नींद से झांकती मिली,
    वक़्त का पंछी घरोंदे से उड़ा,
    अब कहाँ ले जाए तूफाँ क्या पता|

  6. Pushpendra Kumar - September 30, 2020, 10:30 pm

    बहुत उम्दा लिखा आपने

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