गरीब की कब्र

गरीब की कब्र पर कहाँ कब दीप जलते हैं ,
रेगिस्तान में आसानी से कहाँ फूल खिलते हैं।

चाँद-तारों की ख्वाहिश तो महल वाले रखते हैं

हम जुगनू हैं अपनी फिजाओं के….हम तो खुद से ही खुद को रोशन रखते हैं।।


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4 Comments

  1. PRAGYA SHUKLA - July 14, 2020, 1:43 pm

    Good

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - July 14, 2020, 11:00 pm

    Nice

  3. प्रतिमा चौधरी - September 26, 2020, 1:42 pm

    बहुत ही उम्दा रचना

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