चाय की प्याली

तेरे साथ बिताई मस्ती और चाय की वो चुस्की याद आई है,
लो आज फिर से बीते लम्हों की एक बात याद आई है,
तेरे साथ बैठ कर जो बनाई थी बातें,
उन बातों से फिर से दो कपों के टकराने की आवाज आई है,
छोड़ दी थी चाय की प्याली कभी की हमने,
मगर आज फिर से तेरे साथ चाय पीने की इच्छा बाहर आई है॥
राही (अंजाना)


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4 Comments

  1. Nitesh Chaurasia - February 15, 2017, 4:53 pm

    Wah

  2. Neha Saxena - February 16, 2017, 12:24 pm

    Waah

  3. Abhishek kumar - November 25, 2019, 8:31 pm

    Awesome

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