दिल का पथिक

हालात जमाने की कुछ वक्त की नजाकत,
कैसे कैसे बहाने भूलों के वास्ते।
अपनों के वास्ते कभी सपनो के वास्ते,
बदलते रहे अपने उसूलों के रास्ते।
कि देख के जुनून हम वतनों की आज,
जो चमन को उजाड़े फूलों के वास्ते।
करते थे कल तक जो बातें अमन की,
निकल पड़े है सारे शूलों के रास्ते।
खाक छानता हूँ मैं अजनबी सा शहर में,
क्या मिला खुदा तेरी धूलों के वास्ते।
दिल का पथिक है अकेला”अमिताभ” आज,
नाहक हीं चल पड़ा है रसूलों के रास्ते।

अजय अमिताभ सुमन:सर्वाधिकार सुरक्षित

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6 Comments

  1. राही अंजाना - January 19, 2019, 9:46 pm

    वाह

  2. Ajay Amitabh Suman - January 19, 2019, 10:09 pm

    धन्यवाद

  3. देवेश साखरे 'देव' - January 19, 2019, 11:06 pm

    बहुत खूब

  4. Ajay Amitabh Suman - January 20, 2019, 6:51 am

    धन्यावद

  5. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 4:59 pm

    क्या बात है सर

  6. राम नरेशपुरवाला - September 10, 2019, 11:01 pm

    Good

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