*परिवर्तन*

सब एकही राहपे चलते हैं
आँँखें बंद किए सर झुकाए
बस्स एकही बंदा होता हैं
आँखे खोलके मूडता हैं
वही परिवर्तन लाता हैं


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8 Comments

  1. Rugved More - December 29, 2020, 5:29 pm

    Nice topic 👍

  2. Yugandhara More - December 29, 2020, 5:38 pm

    बहुत सुंदर

  3. Geeta kumari - December 29, 2020, 6:32 pm

    Nice

  4. Sandeep Kala - December 29, 2020, 8:27 pm

    Very good

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 29, 2020, 9:01 pm

    बहुत खूब

  6. Satish Pandey - December 29, 2020, 9:54 pm

    अति सुंदर पंक्तियाँ

  7. Pragya Shukla - December 30, 2020, 5:20 pm

    बिल्कुल सही कहा….

  8. Satish Pandey - January 4, 2021, 4:17 pm

    बहुत खूब सुन्दर अभिव्यक्ति

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