फेसबुक के चक्कर में

सदा सड़क पर बांध के मुखरा
घूमने वाली मैं थी जिसका
घुटन भला क्यों हो रही आली
घूंघट में ,क्या कारण इसका?
बेपर्द बनाया जग ने मुझको
या दोषी हूँ खुद हीं इसका ?

सिर से आंचल कैसे हट गई
तन मन कब बेपर्द हुआ?
मान घटा या बढ़ गया अपना
अपनों को कुछ दर्द हुआ।
फेश बुक के चक्कर में
सब रिश्ता बेपर्द हुआ।।

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

“मैं स्त्री हूं”

सृष्टि कल्याण को कालकूट पिया था शिव ने, मैं भी जन्म से मृत्यु तक कालकूट ही पीती हूं।                                                    मैं स्त्री हूं।                                              (कालकूट –…

Responses

  1. सोशल मीडिया के जहां फायदे हैं
    वही बहुत सारे नुकसान भी हैं
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति शास्त्री सर

    और सर ! समय-समय पर
    हौसला अफजाई करने के लिए
    तथा निष्पक्ष भाव से समीक्षा के लिए
    बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद
    आपका🙏

  2. सोशल मीडिया के साइड इफेक्ट्स बताती हुई बेहद शानदार प्रस्तुति भाई जी।

New Report

Close