बशीधर

जब भी मनमोहन, श्याम सलोना, बंशीधर मुरली बजाने लगा,
ह्रदय तल के धरातल पे वो प्रेम की ज्योति जलाने लगा,

कभी गैयों और ग्वालों का प्यारा कन्हिया गोपियों संग रास रचाने लगा,
कभी माँ जसोदा का छोटा सा लल्ला फोड़ मटकी से माखन खाने लगा,

कभी बन्धन में जो बंधा ही नहीं वो ओखल में बन्ध कर मुस्काने लगा,
कभी गोपियों संग श्री राधे के प्रेम में वो प्रेम से प्रेम निभाने लगा॥
राही (अंजाना)

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3 Comments

  1. Abhilasha Shrivastava - August 24, 2019, 3:57 pm

    Suiting the occasion

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 11, 2019, 11:57 am

    वाह बहुत सुंदर

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