ममता

ममता मूल दुखद तरुवर के ,नैनन नीर बहावे।
निर्मोही जड़ जीव जगत में ,सुख सरिता बहावे।।
श्वान शुका अजशावक जे , मरत मूढ़मति आवे।
निश-दिन मूषक मरत बथेरे, केहू ना दुख मनावै


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6 Comments

  1. Praduman Amit - December 4, 2020, 6:59 pm

    शब्दों के जाल अति उत्तम है।

  2. Satish Pandey - December 4, 2020, 10:09 pm

    वाह बहुत खूब, अति उत्तम

  3. Rishi Kumar - December 5, 2020, 7:21 am

    अति सुंदर

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