मुझे उड़ने दो

पाषाण से दरिया बनने दो ,
मुझे अपने हक में लड़ने दो।
मैं छुईमुई सी गुड़िया नहीं ,
मुझे लक्ष्मीबाई बनने दो ।
आजाद परिंदा बनने दो,
ना काटो पंख मुझे उड़ने दो।

निमिषा सिंघल

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11 Comments

  1. राम नरेशपुरवाला - October 1, 2019, 7:49 am

    वीरांगना की बोली है

  2. देवेश साखरे 'देव' - October 1, 2019, 12:47 pm

    बहुत सुन्दर

  3. Poonam singh - October 1, 2019, 3:24 pm

    Nice

  4. nitu kandera - October 4, 2019, 10:23 am

    Nice

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