राम मेरे आदर्श है

कविता- राम मेरे आदर्श हैं
———————————–
राम मेरे आदर्श हैं भाई
भारत माँ के पुत्र हैं भाई,
जीसस मोहम्मद गुरु नानक बुद्ध से पहले
राम दुनिया के भगवान हैं भाई,
रघुकुल के प्राण हैं,
शबरी निषाद की जान हैं,
माँ सीता के प्राण प्रिय हैं
भक्त हनुमान के भगवान हैं,
अहिल्या की पहचान हैं,
सुग्रीव के वरदान हैं,
पापी बालि के लिए काल,
पुत्र अंगद के अभिमान हैं
जटायु के सम्मान हैं,
नर नील के आदर्श हैं,
भक्त विभीषण के छांव हैं
सुपर्णखा के लिए सबक राम हैं,
हम दुनिया के मजहब में,
उलझे हुए इंसान है,
मैं भारतीय ईसाई होकर भी,
राम से ही मेरी पहचान हैं,
मानो चाहे जिस धर्म भगवान को,
राम जैसा मर्यादित पुरुष कहाँ मिलेगा,
वैरी, वैरी के भाई का शुभचिंतक हो,
दुनिया में ऐसा भगवान कहाँ मिलेगा,
——————————————–
✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

New Report

Close