वो बेख़ौफ दिखाती है, अपनी पहचान

वो बेख़ौफ़ दिखाती है,
अपनी पहचान,
छिपती ही नहीं परदे के पीछे,
रोका है उसे, टोका हैं उसे,
छुपाया हैं, उसे,
दबाया है उसे,
फिर भी छिपती ही नहीं परदे के पीछे,
और बेख़ौफ़ दिखाती है,
अपनी पहचान,
वो जता देती है,
वो मदद करती हैं,
पराये की भी अपनों की तरह,
वो दिल रखती है अपना ,
सोने-सा होकर।
वो जता देती है,
उसका न होना क्या है।
बिन माँ के बच्चे का होना क्या है,
बिन गोद की दुलार का होना क्या है,
वो बेख़ौफ़ दिखा देती है,
अपनी पहचान,
हर रास्ते पर वो चलती है,
देती है, हमारा साथ,
वो औरत है,
जो कही न कही , छुपी रहती है,
किसी परदे के पीछे,
और बता देती है,अपनी पहचान।


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10 Comments

  1. Geeta kumari - September 1, 2020, 5:53 pm

    अति उत्तम रचना

  2. प्रतिमा चौधरी - September 1, 2020, 5:54 pm

    धन्यवाद जी

  3. Priya Choudhary - September 1, 2020, 6:50 pm

    बिल्कुल सही बात अगर वह पर्दे के पीछे से आपका साथ दे सकती है तो वह सामने आकर क्या नहीं कर सकती

  4. मोहन सिंह मानुष - September 1, 2020, 8:04 pm

    हर सफलता के पीछे किसी ना किसी नारी का हाथ होता है इस कथन को सार्थकता प्रदान करती हुई बहुत ही सुंदर रचना

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 2, 2020, 1:52 pm

    Sunder

  6. Deep Patel - September 24, 2020, 11:11 am

    bahut sundar

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