शायरी

इस मतलबी दुनिया मे सभी दौलत कमाते फिरते
अगर इस दुनिया से मिला मुझे मजदुरी की रूप शिर्फ छाले।

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दौलत

कोई ज़मीं बेचता, कोई आसमां बेचता । दौलत के नशे में चूर, ये ज़हां बेचता । कब परवान चढ़ा, मोहब्बत मुफ्लिशी का, दौलत मोहब्बत का…

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