सिसकियाँ

कुछ ऐसा न करो के कोई तुम्हारी गवाही न दे,
आँखों की सलाखों में रखे पर तुम्हें रिहाई न दे,

जो भी कहना है उसे आईने सा साफ़ रखो तुम,
ऐसा न हो के चेहरा तुम्हें तुम्हारा ही दिखाई न दे,

क्या फायदा ऐसे हजारों दुनियां के कानों का,
जब किसीको किसीकी सिसकिया सुनाई न दे।।

राही अंजाना

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8 Comments

  1. Poonam singh - October 4, 2019, 4:32 pm

    Good

  2. NIMISHA SINGHAL - October 4, 2019, 7:57 pm

    Goodone

  3. Nikhil Agrawal - October 5, 2019, 8:16 am

    Damdaar lines

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - October 5, 2019, 1:16 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां

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