“हकीकत”

ना जाने लोग अपनी “मंज़िल” को सपना क्यों कहते हैं?
मंज़िल तक जाना , उसे पाना
सपना नहीं “हकीकत” बनाना चाहती हूँ !


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6 Comments

  1. Anirudh sethi - February 8, 2017, 7:36 pm

    very nice ji

  2. Mithilesh Rai - February 9, 2017, 6:05 am

    बेहतरीन

  3. Mithilesh Rai - February 9, 2017, 6:06 am

    बहुत खूब

  4. Rohan Sharma - February 9, 2017, 1:22 pm

    Nice one

  5. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 12, 2019, 7:43 pm

    बहुत बढ़िया

  6. Abhishek kumar - November 25, 2019, 8:11 pm

    सुन्दर रचना

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