हिन्दी गजल- दिल की किताब |

हिन्दी गजल- दिल की किताब |

हिन्दी गजल- दिल की किताब |
दिल की किताब तेरी पढ़ लूँ तो क्या होगा |
बिन कहे बात तेरी जान लूँ तो क्या होगा |
जितना चाहो छिपा लो छिपा ना सकोगे |
भाषा तेरी आंखो समझ लूँ तो क्या होगा |
तू मेरे सामने रहे न रहे तुझे पहचान लूँगा |
हवाओ गंध तेरी मै सूंघ लूँ तो क्या होगा |
तू गम सहे मुझे मालूम न हो नामुमकिन |
गम सारे तेरे अगर छिन लूँ तो क्या होगा |
कुछ कहे न कहे राज फिजाँ बता देगी |
तेरे लब्ज जुबां बयां कर लूँ तो क्या होगा |
दो जिस्म समझने की भूल हमे न करना |
तू मुझमे मै तुझमे समां लूँ तो क्या होगा |
जुदा होना चाहे जुदा हो ना पाएगा मुझसे |
तेरी तन्हाई तेरे रूबरू हो लूँ तो क्या होगा |
जाना है जहा छोड़ मुझे जाकर देख लो |
तुझे बाहो आगोस खींच लूँ तो क्या होगा |
मेरे बेगैर तू नहीं मेरे बिना तू नही मान लो |
तुझे मेरे दिल आंखो बसा लूँ तो क्या होगा |
श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,
मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

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7 Comments

  1. Astrology class - November 8, 2019, 7:58 am

    Wah

  2. nitu kandera - November 8, 2019, 9:25 am

    Wah

  3. राही अंजाना - November 8, 2019, 2:58 pm

    वाह

  4. NIMISHA SINGHAL - November 8, 2019, 3:52 pm

    Kya khub

  5. Poonam singh - November 8, 2019, 4:05 pm

    Nice

  6. Astrology class - November 8, 2019, 8:52 pm

    Good

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