अभागी क़िस्मत

आज तू हंस ले ,
खुलकर मुझ पर,
मगर ,थोड़ा सा सब्र कर;
अरी; सुन ! मेरी अभागी क़िस्मत!
मैं सीख तुम्हें सीखलाऊंगा,
मेहनत की जंजीरों से जकड़कर,
मुलाजिम तुम्हें बनाऊंगा।
मुलाजिम, तुम्हें बनाऊंगा!

——मोहन सिंह मानुष

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Responses

  1. प्रेरणादायक पंक्तियां।
    ‘ खुदी को कर बुलंद इतना,
    कि हर तक़दीर से पहले,
    खुदा बंदे से खुद पूछे,
    बता ,तेरी रज़ा क्या है।”

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