आओ ताली बजाते हैं!
आओ थाली बजाते हैं!
गरीबी का मुंह दिखाने वाली,
बेरोजगारी के लिए ,
आओ ताली बजाते हैं!
देश की कमर तोड़ने वाली
मरी हुई अर्थव्यवस्था के लिए,
आओ थाली बजाते हैं!
झूठ को सच बनाने वाली
दलाल मीडिया के लिए ,
आओ ताली बजाते हैं!
आओ थाली बजाते हैं!
गरीबी का मुंह दिखाने वाली,
बेरोजगारी के लिए ,
आओ ताली बजाते हैं!
देश की कमर तोड़ने वाली
मरी हुई अर्थव्यवस्था के लिए,
आओ थाली बजाते हैं!
झूठ को सच बनाने वाली
दलाल मीडिया के लिए ,
आओ ताली बजाते हैं!
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झूठ को सच बनाने वाली
दलाल मीडिया के लिए
आओ ताली बजाते हैं
सच्चाई को आपके सामने ला दिया
आपकी रचना को सलाम
विचारों का सम्मान करने के लिए ऋषि जी बहुत-बहुत आभार
सुन्दर कविता
बहुत-बहुत धन्यवाद मैडम जी
एक एक शब्द सत्य है
बहुत-बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी
वर्तमान सरकार व मिडिया पर बहुत अच्छा तंज़ तथा सच्चाई को प्रकट करती हुई बहुत सुंदर रचना
सुंदर समीक्षा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद
अतिसुंदर रचना
बहुत बहुत आभार शास्त्री जी
कम शब्दों में आपने बहुत कुछ कह दिया, सही अर्थों में आपकी कविता गागर में सागर है
‘आओ ताली बजाते हैं!’ बहुअर्थी प्रयोग है
इतनी सुंदर समीक्षा के लिए,सादर आभार वसुंधरा जी