गुस्सा तो कमजोर का, गुण होता है मान,
गुस्से से इंसान का, कम होता सम्मान।
कम होता सम्मान, कभी गुस्सा मत करना,
बढ़ते जाना और, स्वयं मन स्थिर रखना।
कहे लेखनी कहा, बुजुर्गों ने यह किस्सा,
वही सफल है आज, छोड़ दे जो मन गुस्सा।
———- डॉ0 सतीश चंद्र पाण्डेय,
गुस्सा तो कमजोर का गुण(कुंडलिया छन्द)
Comments
5 responses to “गुस्सा तो कमजोर का गुण(कुंडलिया छन्द)”
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गुस्सा तो कमजोर का, गुण होता है मान,
गुस्से से इंसान का, कम होता सम्मान।
कम होता सम्मान, कभी गुस्सा मत करना,
__________ कवि सतीश जी की गुस्सा ना करने की छंद शैली में बहुत ही सुंदर और प्रेरक रचना । लाजवाब शिल्प और बहुत सुंदर भाव सहित, श्रेष्ठ कवि की श्रेष्ठ रचना, वाह! -
अतिसुंदर भाव
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गुस्सा न करने पर कवि सतीश पाण्डेय जी की बहुत सुन्दर कविता
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यह बात तो सच कही पाण्डेय जी, अति उत्तम
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बहुत सुंदर
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