*फागुन की यह ख़ास पूर्णिमा*

दही बड़े खट्टी-मीठी चटनी संग,
मैंने बहुत बनाए l
लाल, गुलाबी केसरिया पीले,
रंग भी बहुत लगाए l
मीठी गुजिया, चटपटे दही बड़े,
सब ने मिलजुल कर खाए l
आप की होली कैसी रही,
हमको भी बतलाओ..
फागुन की यह ख़ास पूर्णिमा,
कैसे मनी बताओ॥
_______✍गीता

Comments

7 responses to “*फागुन की यह ख़ास पूर्णिमा*”

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद पीयूष जी

  1. Satish Pandey

    मीठी गुजिया, चटपटे दही बड़े,
    सब ने मिलजुल कर खाए l
    —— बहुत उत्तम और सरस प्रस्तुति

  2. सुंदर समीक्षा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

  3. शानदार लेकर बहुत ही सुंदर रचना

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