भरी बरसात है,

ओढ़ लो छतरी
भरी बरसात है,
आंसुओं से भीग जाओगे कहीं।
मेघ अब भी हैं घुमड़ते वक्ष पर
इसलिए छतरी बिना आओ नहीं।

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Responses

  1. बहुत सुंदर रचना…..
    छतरी ना भी हो तो आंसू पहचान जाओगे
    वो कितने दुःखी हैं,एक पल में जान जाओगे।

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