मुखौटे

मुखौटे लगा कर,
आए हैं कुछ लोग
महफ़िल में आज का,
मज़मून क्या है..

*****गीता

Comments

8 responses to “मुखौटे”

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

  1. सीधी, सच्ची, सपाट, गागर में सागर है। बहुत खूब रचना

    1. सुन्दर समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी

    1. Geeta kumari

      Thank you

  2. 🤔 वाह क्या क्या बात है

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

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