सावन की सभा

सावन की सभा सजी है,
शुक्रवार की शाम है ।
महफ़िल में मित्र मिले है ,
सबके सुंदर – सुंदर नाम हैं ।
मित्र बने अनजाने थे सब,
अब लगते हैं, पहचाने से..।

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Responses

  1. मित्र बने अनजाने थे सब,
    अब लगते हैं, पहचाने से..।
    वाह, बहुत ही सुंदर और आत्मीय अभिव्यक्ति। लेखनी का अभिवादन

    1. आपकी प्रेरक और सुंदर समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया सतीश जी । ये मेरा बहुत उत्साह वर्धन करती हैं।🙏

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