साजिशें

साजिशें भी थीं, सामने गुनहगार भी थे।
जवाब हमारे पास, तैयार भी थे।
हम चुप रह कर सब सहते रहे,
थोड़े नादान ही सही हम,मगर
थोड़े समझदार भी थे।

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Responses

  1. अत्यंत सरल शब्दों में सच्ची बात सामने लाती हुई पंक्तियाँ, आपकी एक एक कविता स्तरीय है। वाह वाह

    1. आप के मूल्यांकन पर खरा उतरना मेरे लिए गर्व की बात है, क्योंकि उच्च कोटि के कवि की प्रशंसा हर एक के नसीब में नहीं होती है। उत्साह – वर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार 🙏

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