12 Comments

  1. बहुत हृदय स्पर्शी रचना है प्रज्ञा…
    कलम क्या कागज़ भी रो पड़ा होगा ।
    …… उत्कृष्ट लेखन

  2. मेरी व्यथा से
    सारे पन्ने भर गये
    कलम भी बेबस होकर
    रोने लगी
    इतना दर्द था मेरे एक-एक
    लफ्ज में…!!
    अत्यंत मार्मिक, मानवीकरण का सुन्दर प्रयोग

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