7 Comments

  1. “लेकिन कर्म भी तो अपने अपने हिसाब का है आली” बहुत शानदार रचना है ।
    कर्म ही महत्व पूर्ण है । ये सुन्दर संदेश देती हुई बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति well done satish ji , keep it up .

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