तुम मेरी भावनाओं का अनुवाद हो…
तुम मेरी भावनाओं का
अनुवाद हो
तुम मेरी आकांक्षाओं का
आकार हो
साकार होगा हर स्वप्न मेरा
गर तुम जो मेरे साथ हो
तुम्हारे स्वप्न मेरे स्वप्नों के
बिम्ब हैं
तुम हमारे हम तुम्हारे
प्रतिबिम्ब हैं
दे ना दे गर साथ कोई
तुम हमारे ही रहोगे
मिलने में प्रियतम हमारे
अब कहाँ विलम्ब है….
अतिसुंदर
Thanks
तुम मेरी भावनाओं का
अनुवाद हो
तुम मेरी आकांक्षाओं का
आकार हो
साकार होगा हर स्वप्न मेरा
गर तुम जो मेरे साथ हो
तुम्हारे स्वप्न मेरे स्वप्नों के
बिम्ब हैं।
उच्च कोटि का शिल्प तथा उच्च कोटि की कल्पना है आपकी शिल्प बहुत ही सुंदर और मजबूत है।
आपके कविताओं को सराहना ना मिलती देखकर मुझे बहुत ही खेद हो रहा है और ऐसे लोगों को सावन प्रोत्साहित करता है यह भी सोचने वाली बात है।
बहुत-बहुत धन्यवाद इतनी सुंदर और सटीक समीक्षा हेतु
उच्च कोटि का शीर्षक तथा बहुत ही प्यारी बनके लिखी है।
आपने तुम मेरी भावनाओं का अनुवाद प्रेम को इससे
ज्यादा सुंदर तरीके से व्यक्त किया ही नहीं जा सकता ।
मैं मास्टर साहब की बात से भी सहमत हूं।
बहुत-बहुत धन्यवाद