6 Comments

  1. कि अब ना बजती
    बंशी की धुन कहीं
    गइयों को ठौर नहीं
    माखन चुराने आ जाओ…हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ
    ________ भगवान श्री कृष्ण की आराधना करते हुए बहुत सुंदर रचना, जय श्री कृष्ण

  2. हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ
    हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ ||

    कि अब ना बजती
    बंशी की धुन कहीं
    गइयों को ठौर नहीं
    माखन चुराने आ जाओ…

    बहुत सुंदर रचना
    भगवान श्री कृष्ण जी पर बहुत ही श्रेष्ठ रचना
    श्री कृष्ण जी के किए गए कार्य को याद करती हुई तथा उन्हें बुलाती हुई सुंदर कविता

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