दोष तुम्हारा क्या है अबले तुम काहे को घबड़ाती हो। मिले दण्ड अब उन दोषी को जो तुझको हर पल तड़पाती हो।। मर जाओगी खुद जाओगी बस अपनी हस्ती मिटाकर। तेरे जगह कोई और आएगी […]
दोष तुम्हारा क्या है अबले तुम काहे को घबड़ाती हो। मिले दण्ड अब उन दोषी को जो तुझको हर पल तड़पाती हो।। मर जाओगी खुद जाओगी बस अपनी हस्ती मिटाकर। तेरे जगह कोई और आएगी […]
संसद साहित्य और सिनेमा । सत्य और संस्कार का है खेमा।। पर्दे और पुस्तकें सब कल्पनाओं का संसार है। कल्पना कहाँ दुनिया में सत्य का ही एक प्रसार है।। संसद के शिक्षित व संस्कारी नेताओं […]
मुझे मिले नहीं भगवान हाय, मन्दिर के भीतर। मैं बना रहा नादान हाय, मन्दिर के भीतर।। मातु-पिता सच्चे ईश्वर हैं क्यों न तू पहचान करे। जन्म दिया और पाला-पोषा पल-पल हीं कल्याण करे।। सेवा बिना […]
तुम बिल्डर हो उम्र में इल्डर हो हो सके तो मेरे मन के किसी कोने में अपना घर बना लो। वीरान -सा छाया है हर तरफ यहाँ पर अपने प्यार का सुंदर -सा शहर बना […]
शिव गिरिजा संग आए घूमने पृथ्वी लोक में एक बार। कहीं पे देखा झगड़ा -झंझट और कहीं पे देखा प्यार।। पति -पत्नी की जोड़ी कोई झगड़ रहे थे आपस में। छींटाकसी और गालियों से माहौल […]
शिक्षा की चौपाल लगी कहाँ रहे अब पढ़ने वाले। संभावित प्रश्नों को रटकर कागज पर हीं बढ़ने वाले।। कई तरह के बोर्ड यहाँ हैं हर भाषा हैं माध्यम के। अंग्रेजी में काम करे सब डाले […]
हिन्दी के व्याख्याता एक बोल रहे थे सेमिनार में। हिन्दी का प्रसार हो जन-जन और सरकार में।। बजवाई खूब तालियाँ बात- बात पे मञ्च से। समय खत्म होते ही बेमन आए मञ्च से।। खूब अनोखे […]
कबूतरों का झुंड एक उड़ रहा था आकास में। बीच झाड़ियों के बहुत दाने पड़े थे पास में।। युवा कबूतर देख-देख ललचाया खाने के आश में । बोल उठा वो सबके आगे उतर चलें चुगने […]
ज्ञान के पथ पर विवाद मिलेगा। प्रेमी बनकर देख अह्लाद मिलेगा।।
बाहर विषाद है भीतर शमशाद है । अंतर्मुखी हो जाओ आली फिर देखो प्रसाद हीं प्रसाद है।।
सावन की बहार है कविताओं की बौछार है। कवियों और कवयत्रियों का पावन ये परिवार है।।
जहाँ मुस्कुराहटों की दौर है। अन्यत्र कहाँ अपना ठौर है।।
एक परदेशी ने तुम पर भरोसा किया। तुम कपटी हुई , उससे धोखा किया ।। नारी तो होती है ममता की मूरत। क्या तुझको नहीं थी उसकी जरुरत।। ज़िन्दगी के बदले मौत का तोफा दिया। […]
खुदा ने पत्थर को वनडोल बनाया। दम है उस जौहरी में जो अनमोल बनाया।।
मीच के आँखें रोते -रोते खोज रहा हूँ होकर मौन। मुझको रुलानेवाला जग में छुपकर बैठा आखिर कौन? नजर भला वो आए कैसे घर में बैठा बनकर डाॅन ।।
पाकर सब नदियों का पानी सागर को खूब मचलते देखा। पत्थर के कलेजे रखनेवाले हिमालय को पिघलते देखा।। गम्भीर बड़ा आकाश मगर हमने उसको भी रोते देखा। सबको पाक करे जो नदियाँ बीच कीचड़ में […]
मान हैं सम्मान हैं देश की जान हैं। आम नहीं खास नहीं राष्ट्र निर्माता हैं शिक्षक। नाक से नेटा टपक रहा था। आंसू का कतरा लुढक रहा था। बाहुपाश में भरकर जिसने अपनाया वो मेरे […]
हृदय के गुहा में सघन था अंधेरा ज्ञान की ज्योति जलाकर मिटाया। लगते भैंस बराबर जो थे उसका सम्यक अक्षर बोध कराया।। मूढ़मति को निज कृपा दृष्टि से ज्ञान जगत में मान दिखाया। पिला के […]
माँ तुम्हारे चरणों को धोता है हिन्द सागर। बनके किरीट सिर पे हिमवान है उजागर।। माँ….. गांवों में तू है बसती खेतों में तू है हँसती गंगा की निर्मल धारा अमृत की है गागर।। माँ…. […]
पत्थर का दिल कभी पिघलता नहीं इसलिए तो इसमें गुमान भी नहीं होता। तभी तो इसकी पूजा होती, हर घर में नित सम्मान हीं होता।।
कब से तुम्हारी राह में नजरें बिछाए बैठे हैं। चले भी आओ कि महफिल सजाए बैठे हैं।।
दोष नहीं दर्पण का थोड़ा सदा सत्य दिखलाता है। कपटी क्रूर कपूत घमण्डी दर्पण को दोषी कहता है।। सत्य असत्य के चक्कर में पत्थर से पंगा मत लेना। देख ‘विनयचंद ‘सीसा हो तुम इसको मत […]
पकड़ मत कान री मैया कसम कुण्डल की खाऊँ मैं। शिकायत कर रही झूठी कहानी सच की बताऊँ मैं ।। करूँ क्यों मैं भला चोरी घर में हैं बहुत माखन। नचाती नाच छछिया पे चखूँ […]
मनमोहक छवि मनमोहन की और मनहर है हर लीला उनकी। आनन्दकन्द आनन्द सबन हित घर-घर चोरी की माखन की।।
नहीं आँचल कभी खिसकने दी वो अपने माथ से। आज देख रहे हैं सब उसको होकर यूं अनाथ से।।
आज न सुन रही थी न हीं पढ़ रही थी वो केवल लेटी थी। मेरी कविताओं को पढ़कर खुश होनेवाली बहू नहीं वो बेटी थी।।
एक बहना चली बांधने राखी अपने भाई के हाथ में। क्रूर काल ने बदल दिया इसे आखिरी मुलाकात में।।
वो मेरे सिर्फ अपने की अपनी थी। महसूस न होने दिया पराएपन को फिर मैं कैसे कहूँ नहीं अपनी थी।
एक बात भी न कर गई वो जाते हुए। हम सब को जग में छोड़ गई रुलाते हुए।।
बस यही सोचकर रोता हूँ मैं मौन -मौन। सबके हार गीले हैं आंसूओं से मेरी आँखों को पोछेगा आखिर कौन।।
वाह वाह मेरे विश्वकर्मा जी शिल्पकला का सबको कुछ न कुछ तो ज्ञान दिया। किसी को बढ़ई बनया तो किसी को कुम्भकार का मान दिया।। लोहार सोनार मिस्त्री का रूप राजकारीगर का शान दिया। पर […]
चार राखी लाना पापा अबकी रक्षाबन्धन में। बड़े प्यार से बांधूगी मैं वीरों के अभिनन्दन में।। पहली राखी बांधूगी मैं भारत के वीर शहीदों को। दूसरी राखी बांधूगी मैं शरहद के वीर सपूतों को।। तीसरी […]
आया राखी का पावन त्योहार भैया। तुझको पुकारे बहना का प्यार भैया।। फूल अक्षत चंदन से मैं थाली सजाई। मेवा मधुर और घी की ज्योति जगाई।। आंगन में अहिपन बनाई दो-चार भैया। आजा, तुझको पुकारे […]
क्या कहने उस दिन के जब गुरूजी हुआ करते थे। घर में हो या पाठशाला में तन-मन से बच्चे पढ़ते थे।। एक आदर था सबके दिल में ग्रंथ गुरू और ज्ञान प्रति। होकर उत्तीर्ण कक्षा […]
वो शब्द कहाँ है शब्दकोष में जो माँ की महिमा का बखान करे। शारदे की लेखनी भी माँ बनके मातृशक्ति का भरसक गान करे।। माँ स्रष्टा है माँ द्रष्टा है माँ हीं तो है पालनकारी। […]
हे परमवीर हे युद्धवीर हे शरहद के रक्षक दुश्मन के खातिर एक नकेल मैं देता हूँ। दुश्मन मिल जाए गर्दिश में जिससे मिनटों में एक आग्नेयास्त्र राफेल मैं देता हूँ।।
हर सुबह हर शाम मेरे मुख से निकले तेरा नाम हे राम हे राम हे राम।।
मातु पिता में ईश्वर होते कहता भारत का ये ज्ञान। माॅम डैड में गोड बसे है क्या कहा फिरंगी ग्रंथ महान।। गुरुकुल की राह भुलाए जब से। ग्रैजुएट मूर्ख कहलाए तब से।। ऐसा मूर्ख भला […]
देश में बेकारी है आखिर किसकी जिम्मेवारी है। अक्षरबोध साक्षरता या अल्पज्ञान की बिमारी है।। मशीनी क्रांति का जोर या फिर बढ़ती हुई आबादी है। रोजगारों का अभाव या फिर निकम्मेपन सरकारी है।। साक्षर नहीं […]
सुख बटाया साथ मिलकर दुःख भी तेरा बाँट लूँगा। उम्र आधी कट गई है उम्र आधी काट लूँगा।। हर कदम पर साथ देंगे हमने खाई थी कसम। चल चुके हम साथ मिलकर शेष अब है […]
मैं दिल की जज़्बात लिखूँ। चाहता हूँ एक नात लिखूँ।। मंदिर और मस्जिद में ढूँढ़ा ढूँढ़ा काबा -काशी में। गंगा और यमुना में ढूँढा ढूँढा जलनिधि राशी में। मिला नहीं जो मुझको उसकी क्या मैं […]
न तुमने देखे न मैंने देखा। बहते पवन को किसने देखा? जुल्फ चुनरिया उड़ते जब जब। बहती हवाएँ समझो तब तब।। बादलों को जो चलते देखा। बहते पवन को उसने देखा।। न तुमने देखे न […]
रिमझिम बरसे सावन सजना। झूले लगे हैं मोरे अंगना।। सब सखियों के आए सजना। क्यों है सूना मेरा अंगना।। आजा अंगना के भाग जगा दे। बमल मोहे झूला झूला दे़……बलम मोहे झूला झूलादे।। लहगा चुनरी […]
रिमझिम बरसे फुहार देखऽ सवनमा में। झूला लगाय दऽ पिया मोर अंगनमा में।। हरियर चुनरी हरियर चोलिया हरियर हरियर पहिरनी चूड़िया कलईया में। हथवा में मेंहदी रचैली सनम नाम ले ले के तोहरे पियाजी बलईया […]
शुभ रात्रि मैं कहता हूँ पर अँखियों में है नींद नहीं। मन भौरा है कैद में ये कारा है अरविंद नहीं।।
सावन भी आया अमावस भी आई। रिमझिम फुहार संग पावस भी आई।। बागों में , खेतों में छाई हरियाली। हाथों में मेंहदी भी मैंने रचा ली।। दिल के उपवन ने झूला लगाया। मन के संदेशा […]
अपने खामोश लबों को कुछ शरारत तो दे दो। मुझे बात करने की थोड़ी इजाजत तो दे दो।।
कानून के दहलीज़ पर पहुँचने से पहिले मारा गया कानून के रक्षक का हत्यारा। कोई तो बतलाओआखिर कब तक जिन्दा रहेगा बाँकी कानून का हत्यारा।।
आम खाके गुठलियों का ढेर लगाना है मेरी नहीं फ़ितरत। एक गुठली से बृक्ष लगाना, चाह मेरी और मेरी यही फितरत।।
बेशक जहरीले होते हैं फिर भी इनकी होती अर्चन। कालव्याल से कालक्षेप हित करते हम सब वन्दन।। ऐसा धर्म सनातन अपना जिसका न कोई शानी है। ‘विनयचंद ‘ संग सारी दुनिया दिल से ये सब […]
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