Pt, vinay shastri ‘vinaychand’'s Posts

पकड़ मत कान री मैया

पकड़ मत कान री मैया कसम कुण्डल की खाऊँ मैं। शिकायत कर रही झूठी कहानी सच की बताऊँ मैं ।। करूँ क्यों मैं भला चोरी घर में हैं बहुत माखन। नचाती नाच छछिया पे चखूँ मैं स्वाद को माखन।। चूमकर गाल को मेरे करती लाल सब ग्वालन। छुपाने को इसी खातिर लगाती मूँह पे माखन।। सताई सब मुझे कितना तुझे कैसे बताऊँ मैं? पकड़ मत कान री मैया कसम कुण्डल की खाऊँ मैं।। शिकायत कर रही झूठी कहानी सच की बताऊँ मैं।। चराए शौख से कन्... »

माखन की चोरी

मनमोहक छवि मनमोहन की और मनहर है हर लीला उनकी। आनन्दकन्द आनन्द सबन हित घर-घर चोरी की माखन की।। »

मुक्तक

नहीं आँचल कभी खिसकने दी वो अपने माथ से। आज देख रहे हैं सब उसको होकर यूं अनाथ से।। »

लेटी थी

आज न सुन रही थी न हीं पढ़ रही थी वो केवल लेटी थी। मेरी कविताओं को पढ़कर खुश होनेवाली बहू नहीं वो बेटी थी।। »

आखिरी मुलाकात

एक बहना चली बांधने राखी अपने भाई के हाथ में। क्रूर काल ने बदल दिया इसे आखिरी मुलाकात में।। »

अपने की अपनी

वो मेरे सिर्फ अपने की अपनी थी। महसूस न होने दिया पराएपन को फिर मैं कैसे कहूँ नहीं अपनी थी। »

जाते हुए

एक बात भी न कर गई वो जाते हुए। हम सब को जग में छोड़ गई रुलाते हुए।। »

आखिर कौन

बस यही सोचकर रोता हूँ मैं मौन -मौन। सबके हार गीले हैं आंसूओं से मेरी आँखों को पोछेगा आखिर कौन।। »

राजकारीगर

वाह वाह मेरे विश्वकर्मा जी शिल्पकला का सबको कुछ न कुछ तो ज्ञान दिया। किसी को बढ़ई बनया तो किसी को कुम्भकार का मान दिया।। लोहार सोनार मिस्त्री का रूप राजकारीगर का शान दिया। पर राज कहाने के ख़ातिर ‘विनयचंद ‘ ये काम किया।। जोड़ के टेढ़े -मेढे घर खुद को क्यों बदनाम किया। काम करो तू वही ‘विनयचंद ‘ जिसमें न हो छिया-छिया।। »

चार राखी लाना पापा

चार राखी लाना पापा अबकी रक्षाबन्धन में। बड़े प्यार से बांधूगी मैं वीरों के अभिनन्दन में।। पहली राखी बांधूगी मैं भारत के वीर शहीदों को। दूसरी राखी बांधूगी मैं शरहद के वीर सपूतों को।। तीसरी राखी बांधूगी मैं अपने प्यारे भ्राता को। चौथी राखी बांधूगी मैं अपने जन्मदाता को।। ‘विनयचंद ‘ इन चारों से हम हैं सदा सुरक्षित। इनका करें सम्मान सदा रखकर इन्हें सुरक्षित।। »

आया राखी का पावन त्योहार भैया

आया राखी का पावन त्योहार भैया। तुझको पुकारे बहना का प्यार भैया।। फूल अक्षत चंदन से मैं थाली सजाई। मेवा मधुर और घी की ज्योति जगाई।। आंगन में अहिपन बनाई दो-चार भैया। आजा, तुझको पुकारे बहना का प्यार भैया।। आया राखी का पावन त्योहार भैया……।। सब मंगल भरे हैं इन धागों में यार। ना मामूली है इसमें बहना का प्यार। दिल से दिल का ये है आधार भैया। जरा सुन ले ‘विनयचंद ‘ पुकार भैया। आजा, त... »

गुरूकुल के वो दिन

क्या कहने उस दिन के जब गुरूजी हुआ करते थे। घर में हो या पाठशाला में तन-मन से बच्चे पढ़ते थे।। एक आदर था सबके दिल में ग्रंथ गुरू और ज्ञान प्रति। होकर उत्तीर्ण कक्षा से सब योग्य पुरुष सब बनते संप्रति।। काश ‘विनयचंद ‘ वो दिन भारत में फिर आ जाता। रोजगार की कमी न रहती जीवन में हर सुख छा जाता।। »

माँ हीं सबकुछ

वो शब्द कहाँ है शब्दकोष में जो माँ की महिमा का बखान करे। शारदे की लेखनी भी माँ बनके मातृशक्ति का भरसक गान करे।। माँ स्रष्टा है माँ द्रष्टा है माँ हीं तो है पालनकारी। औगुन हरती बच्चों की ये बन रूद्रों की अवतारी।। माँ से हीं तो ‘विनयचंद ‘ अग जग में सम्मान बढ़े।। »

राफेल का भेंट

हे परमवीर हे युद्धवीर हे शरहद के रक्षक दुश्मन के खातिर एक नकेल मैं देता हूँ। दुश्मन मिल जाए गर्दिश में जिससे मिनटों में एक आग्नेयास्त्र राफेल मैं देता हूँ।। »

हे राम

हर सुबह हर शाम मेरे मुख से निकले तेरा नाम हे राम हे राम हे राम।। »

मातु पिता में भगवान

मातु पिता में ईश्वर होते कहता भारत का ये ज्ञान। माॅम डैड में गोड बसे है क्या कहा फिरंगी ग्रंथ महान।। गुरुकुल की राह भुलाए जब से। ग्रैजुएट मूर्ख कहलाए तब से।। ऐसा मूर्ख भला क्या जाने अपना भी वो दिन आएगा। जिसके खातिर सब को छोड़ा आखिर उसी से दुत्कारा जाएगा।। »

बेकारी की जिम्मेदारी

देश में बेकारी है आखिर किसकी जिम्मेवारी है। अक्षरबोध साक्षरता या अल्पज्ञान की बिमारी है।। मशीनी क्रांति का जोर या फिर बढ़ती हुई आबादी है। रोजगारों का अभाव या फिर निकम्मेपन सरकारी है।। साक्षर नहीं ज्ञानी बनो हर हुनरमंद कि जग में उजियारी है । खुद का मालिक बनो विनयचंद ‘ ‘ना इसमें कोई लाचारी है।। »

उम्र आधी काट लूँगा

सुख बटाया साथ मिलकर दुःख भी तेरा बाँट लूँगा। उम्र आधी कट गई है उम्र आधी काट लूँगा।। हर कदम पर साथ देंगे हमने खाई थी कसम। चल चुके हम साथ मिलकर शेष अब है दो कदम।। विष भरी है ज़िन्दगी तो खुशी से चाट लूँगा। सुख बटाया साथ मिलकर दुख भी तेरा बाँट लूँगा।। उम्र आधी कट गई है उम्र आधी काट लूँगा।। »

एक नात लिखूँ

मैं दिल की जज़्बात लिखूँ। चाहता हूँ एक नात लिखूँ।। मंदिर और मस्जिद में ढूँढ़ा ढूँढ़ा काबा -काशी में। गंगा और यमुना में ढूँढा ढूँढा जलनिधि राशी में। मिला नहीं जो मुझको उसकी क्या मैं बात लिखूँ। आखिर कैसे मैं नात लिखूँ।। मौन खड़ी थी मंदिर की मूरत कोलाहल मस्जिद में था। एक दिन पाऊँगा मैं उसको आखिर मैं भी जिद में था।। तिनके में तरू तरू में तिनका आखिर एक जात लिखूँ। खुद में झाँक ‘विनयचंद ‘ हर ... »

बहते पवन को किसने देखा?

न तुमने देखे न मैंने देखा। बहते पवन को किसने देखा? जुल्फ चुनरिया उड़ते जब जब। बहती हवाएँ समझो तब तब।। बादलों को जो चलते देखा। बहते पवन को उसने देखा।। न तुमने देखे न मैंने देखा। बहते पवन को किसने देखा? चहुदिश बजती एक सीटी-सी। तन को ठण्ड लगे मीठी-सी।। बृक्ष लता सब हिलते देखा। बहते पवन को उसने देखा।। न तुमने देखे न मैंने देखा। बहते पवन को किसने देखा? रोसैटी के ये भाव मनोहर। शब्दों के एक हार पिरोकर।। ... »

गीत

रिमझिम बरसे सावन सजना। झूले लगे हैं मोरे अंगना।। सब सखियों के आए सजना। क्यों है सूना मेरा अंगना।। आजा अंगना के भाग जगा दे। बमल मोहे झूला झूला दे़……बलम मोहे झूला झूलादे।। लहगा चुनरी ले के आऊँ। हरी चुड़ियाँ साथ में लाऊँ।। हाथों में मेंहदी लगा के रखना। सनम आऊँगा मैं तेरे अंगना।। सारे लाज शरम तू भगा दे…. सनम मोहे झूला झूला दे।। »

झूला लगाय दऽ पिया मोर अंगनमा में

रिमझिम बरसे फुहार देखऽ सवनमा में। झूला लगाय दऽ पिया मोर अंगनमा में।। हरियर चुनरी हरियर चोलिया हरियर हरियर पहिरनी चूड़िया कलईया में। हथवा में मेंहदी रचैली सनम नाम ले ले के तोहरे पियाजी बलईया में।। गोरवा के पायलिया बोले झनाझन सवनमा में। झूला लगाय दऽ पिया मोर अंगनमा में।। »

मन भौरा

शुभ रात्रि मैं कहता हूँ पर अँखियों में है नींद नहीं। मन भौरा है कैद में ये कारा है अरविंद नहीं।। »

क्यों न आया बलम हरजाई

सावन भी आया अमावस भी आई। रिमझिम फुहार संग पावस भी आई।। बागों में , खेतों में छाई हरियाली। हाथों में मेंहदी भी मैंने रचा ली।। दिल के उपवन ने झूला लगाया। मन के संदेशा से तुझको बुलाया।। क्यों न आया बलम हरजाई मैंने रो रो के रतिया बिताई।। »

खामोश लब

अपने खामोश लबों को कुछ शरारत तो दे दो। मुझे बात करने की थोड़ी इजाजत तो दे दो।। »

कानून का हत्यारा

कानून के दहलीज़ पर पहुँचने से पहिले मारा गया कानून के रक्षक का हत्यारा। कोई तो बतलाओआखिर कब तक जिन्दा रहेगा बाँकी कानून का हत्यारा।। »

मेरी फितरत

आम खाके गुठलियों का ढेर लगाना है मेरी नहीं फ़ितरत। एक गुठली से बृक्ष लगाना, चाह मेरी और मेरी यही फितरत।। »

नागपंचमी

बेशक जहरीले होते हैं फिर भी इनकी होती अर्चन। कालव्याल से कालक्षेप हित करते हम सब वन्दन।। ऐसा धर्म सनातन अपना जिसका न कोई शानी है। ‘विनयचंद ‘ संग सारी दुनिया दिल से ये सब मानी है।। नागपंचमी की बधाई »

सावन में

बरस रहा सावन देखो अपने आंगन में। तृण तरुवर सब नहा रहे निज कानन में।। »

वृक्ष की व्यथा

धरती जल रही अम्बर जल रहा जल रहा सकल जहान । हाल कहे क्या पशु-पक्षियों के हैं व्याकुल सब इन्सान ।। सघन छाँव करके मैं तरूवर सबको पास बुलाया । खुद जलकर सूरज किरणों से सब की जान बचाया ।। खाया पीया बैठ यहाँ पर सब भागे जल के भीतर । छम-छम छप-छप छपाक -छप-छप केहरि मृग अहिगण और तीतर ।। मस्त मगन हो नहा रहे सब पशु पक्षी संग-संग इन्सान । ‘विनयचंद’ कोई मुझे भी ले चल बीच दरिया में करूँ स्नान ।। »

सावन की फुहार

बरस रही सावन की फुहार रिमझिम -रिमझिम रिमझिम -रिमझिम। धरती पर छा गई बहार आओ नाचें छम-छम छम-छम छम-छम।। »

चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर

लेके काँधे पे बन्दूक दिल में देशप्रेम अटूट चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर। न हीं जीवन की मोह न हीं परिजन बिछोह देश के खातिर दिया सब कुछ है छोड़। चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर।। ये हमारे वीर सिपाही लड़ने में न करे कोताही जलती धरती अंबर बरसे घनघोर। चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर।। नहीं किसी से वैर है न अपना कोई गैर है भारत माँ की रक्षा में है न कोई थोड़। चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर।। विस्तार... »

गुरु के चरणकमल

गुरुवर तव चरणन में, है तीन लोक राजित। जिसने लिया सहारा, वो खुशियों में विराजित।। लाखों कमल है जग, तव चरण कमल आगे। दिल में बसा ‘विनयचंद ‘ बन जाओगे बड़भागे।। »

चांद सितारे

नभमंडल को देख हमने तो बस ये सीखे हैं। एक चांद के बिना लाखों सितारे फीके हैं।। प्रेम नगर में आकर भी प्रीत की रीति न सीखे हैं। दु:ख दरिया को पार करे वो जीवन के शुद्ध सलीके हैं।। »

शहीद को सलाम

शरहद पर से पापा मेरे फोन किए थे शाम को। कुछ दिन धीरज रखना बेटा आऊँगा मैं गाम को ।। पढ़ना लिखना खेल कूद में सदा रहो तुम आगे। दादा दादी और अम्मा का रखना ध्यान बड़भागे।। तेरे खातिर ढेर खिलौने लाऊँगा मैं ईनाम को।। कुछ दिन धीरज रखना बेटा आऊँगा मैं गाम को।। देख नहीं सकते दादाजी कान न सुनते दादी की। फिर भी सुनाते हमें कहानी शरहद के शहजादी की।। अम्मा मेरी पूजा करती सदा आपके नाम को। जल्दी आना पापा मेरे अपन... »

क्यों छोड़ दिया

हर कदम साथ देने का वादा किया सिर्फ दो ही कदम चलके छोड़ दिया। तूने खाई थी कसमे साथ जीने की मौत आने से पहले हीं क्यों तोड़ दिया।। बड़ी आश से मैंने पकड़ाई थी अंगूरिया मंजिल आने से पहले हीं क्यों छोड़ दिया। मुश्किल बड़े हैं इश्क़ के राह में क्यों अनजानों से नाता जोड़ लिया।। »

हमीद हो गया

धरती से उठ कर हमीद हो गया। माँ तेरा लाल आज शहीद हो गया।। »

सुनु देशक कसम

चीन केर मोबाइल नञ कीनबय पिया सुनु देशक कसम। टी वी नञ लेबय सी डी नञ लेबय नञ लेबय चाइनीज़ झमकौआ। घड़ी नञ चाही केमरा नञ चाही नञ चाही सजावट कें चीज चमकौआ। देशक त्यौहार आ देशक समान हम कीनबय पिया सुनु देशक कसम।। »

तेरा लाल सो रहा

चुप हो जा मेरी माता बीच तिरंगे तेरा लाल सो रहा। भारत माँ का रक्षक थककर चैन की नींद सो रहा।। सपने में भारत माँ संग खुशियों की खेती है बो रहा। »

कलम की लड़ाई आज हम भी करेंगे

कलम की लड़ाई आज हम भी करेंगे। जनताओं में चेतना सैनिकों में साहस देश भक्ति का भाव आज सबमें भरेंगे। कलम की लड़ाई आज हम भी करेंगे।। कलम की आंसू आज शोला बनेंगे। दुश्मनों के ख़ातिर बम गोला बनेंगे।। ‘विनयचंद ‘दुश्मन अब रो रो मरेंगे। कलम की लड़ाई आज हम भी करेंगे।। »

चार सिंघों की शहादत सलाम

शहीदों की सूची में पंजाबियों का नाम है अव्वल। आज भी चार सिंघों ने देकर शहादत काम किया है अव्वल।। प्रणाम करो ऐ ‘विनयचंद ‘ बार बार बन हम्बल। »

शहीदों को श्रद्धांजलि

विनयचंद यूँ रो रो कर कितने को श्रद्धांजलि दोगे। आँसू कम पड़ जाऐंगे तेरे आखिर कितना रोओगे।। सभी शहीदों के खातिर अब अपना शीश झुकाता हूँ। एक जन्म क्या हर जन्मों में आभार तेरा फरमाता हूँ।। जय जवान…. जय हिन्दुस्तान।। »

शहादत के सात फूल

बीस वीरों की टोली में ये सात रत्न बिहारी हैं। शहादत के सात फूल पे ‘विनयचंद ‘बलिहारी है।। »

शहीद चंदनकुमार के सम्मान में

शहीद चंदनकुमार भोजपुर वाले तुम्हें झुककर सलाम हम करते हैं। फूल कहाँ अपनी अंजली में निज अश्कों का दान हम करते हैं।। 🌹 ॐशांतिॐ 🌹 »

शहीद गणेश हंसदा के सम्मान में

सिंहभूमि के सिंह थे तुम गणेश हंसदा भैया। तेरी शहादत अमर रहेगी सदा सर्वदा भैया।। सम्मान सहित ये ‘विनयचंद ‘ प्रणाम करेगा सदा सदा। साहित्य कलम से करता हूँ बिहार केसरी तुम्हें अदा। 🌹 »

शहीद जयकिशोर सिंह के सम्मान में

पावन जन्मभूमि है वैशाली महावीर भगवान की । सिंह जयकिशोर की शहीदी को दो फूल चढ़ाऊँ मान की।। »

शहीद अमनकुमार के सम्मान में

समस्तीपुर के अमनकुमार। ऋणियाँ रहेगा तेरे बिहार। ।। तेरी कुर्बानी का हिन्दुस्तान। प्रणाम करेगा ससम्मान 🌹 🌹 »

शहीद सुनील कुमार के सम्मान में

कर रहा नमस्कार तुम्हें बारम्बार आज सारा बिहार। तेरे बलिदान को देश के गुमान को भैया सुनील कुमार। ‘विनयचंद ‘का प्रणाम अश्रु बूंद का इनाम तुझ पर सब न्योछार। 🌹 »

शहीद कुन्दन ओझा के सम्मान में

शहीद कुन्दन ओझा तुम शहीद हो गए। सारे भारत में देशभक्ति के बीज बो गए।। सारे झारखंड संग बिहार भी सलाम कर रहा। ‘विनयचंद ‘ऐसे ब्राह्मण पूत पर गुमान कर रहा।। कुन्दन ओझा का बलिदान 🌹 याद करेगा हिन्दुस्तान 🌹 🌍 🌹 »

शहीद कुन्दन यादव के सम्मान में

कुन्दन था मेरा कुन्दन यादव कुन्दन बन के बीच सितारों में। फिर गहना बन निकलोगे तुम खालिस हो कर अंगारों में।। तेरी शहादत अमर रहेगी हर बच्चा बच्चा गाएगा। गान तुम्हारे नाम का ये ‘विनयचंद ‘.नित गाएगा।। तेरी शहादत को सलाम 🌹 🌹 »

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