क्रोध हर लेता है मति,
करता है तन-मन की क्षति।
क्रोध की ज्वाला में न जल,
क्रोध तुझे खाएगा प्रति पल।
क्रोध का विष मत पीना,
मुश्किल हो जाए जीना।
छवि नहीं देख पाता है कोई,
कभी उबलते जल में।
सच्चाई ना देख सकोगे,
कभी क्रोध के अनल में।
क्रोध में होगी तबाही,
शान्ति में ही है तेरी भलाई।
शान्ति का पथ अपना ले,
शान्ति की शक्ति पहचान
शान्ति में ही सुख मिलेगा,
शान्ति में है तेरी शान।।
_____✍️गीता
शान्ति का पथ
Comments
6 responses to “शान्ति का पथ”
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शान्ति में ही है तेरी भलाई।
शान्ति का पथ अपना ले,
शान्ति की शक्ति पहचान
शान्ति में ही सुख मिलेगा
— शांति के पथ पर चलने की प्रेरणा देती कवि गीता जी की उच्चस्तरीय रचना है यह। शिल्प व भाव दोनों ही बहुत सुंदर हैं। लेखनी की यह निरंतरता सदैव ही बनी रहे। -
उत्साहवर्धक और प्रेरणादायक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक स्वागत और धन्यवाद सतीश जी🙏
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बहुत सुंदर
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धन्यवाद भाई जी 🙏
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Waah
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शुक्रिया प्रज्ञा
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