UE Vijay Sharma, Author at Saavan - Page 3 of 70's Posts

रोज़ जीना चाहके भी

रोज़ मार के भी ख़ुद को मर सके रोज़ जीना चाहके भी जी ना सके मरते हुए मरने का करते रहे इंतज़ार जीते हुए करते रहे जीने का इंतज़ार …… यूई   »

मौत ने किया है कुछ इस तरह

मौत ने किया है कुछ इस तरह मेरा इंतज़ार जैसे ज़िन्दगी ख़ुद करे जिंदा रहने का इंतज़ार …… यूई »

ख़ुद की छोड़ लग गई सबकी सुध

कहने को तो हुए हम घर से बेघर इश्क तेरे ने किया ख़ुद से बेखुद ज़िन्दगी कुछ यूँ गुज़री फिर बेसुध ख़ुद की छोड़ लग गई सबकी सुध …… यूई »

सुनाया फ़ैसला

मेरे ही गुनाहों ने हो परेशान मुझसे सुनाया फ़ैसला खुद्की मौत का मुझसे …… यूई »

तुम्हे इश्क कहूँ या अब कहूँ खुदा

तुम्हे इश्क कहूँ या अब कहूँ खुदा अब तो फर्क कोई ना पड़ता है उसके रंगों में रंगा हर काम तेरा तेरे रंगों में रंगा अब हर रंग मेरा …… यूई »

जिसने ख़ुद में खुदी दिखला खुद की

रंग रूह को इश्क के पक्के रंगों को तूने वोह रंग प्यार का दिखलाया है जिसने ख़ुद में खुदी दिखला खुद की इन सब झूठे रंगों से पीछा छुड़ाया है …… यूई »

इज़हांर-ए-इश्क

नज़र-ए-हुस्न ने किया इज़हांर-ए-इश्क जबसे अरमानो को जैसे मेरे लग गए हो पंख तबसे   …… यूई »

बना इश्क उतारा रूह में

जाम से मिलते ही मचलती शराब जैसे मयकदे में झूमते हो बेखुद मयकश जैसे कुछ यूँ ही बेखबर सा हो गया हूँ जगसे बना इश्क उतारा रूह में तूने अपनी जबसे                                             …… यूई »

क्या हुआ जो तेरी नजर नही हमपे

लौटा दो सदाए लाखों बार हमारी ज़िन्दगी का सौदा करके आए हैं क्या हुआ जो तेरी नजर नही हमपे तेरे इश्क में लूटाने हम जान आयें हैं …… यूई »

बीत चुके हैं बरसों जिनको

बीत चुके हैं बरसों जिनको क्यों पल वोह याद दिलाते हो किए गहरे दफन जो जग जग रातों क्यों उनकी अब कब्रे खुदवाते हो                             …… यूई »

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