जीता कौन है यहा जिंदगी आँखें खोल कर मुर्दा बैठे है ख़ुद इनको ही मालूम नही लाईने मौत की लगा बैठे है दिन रात दौलत की चाह में मरने की तैयारी करके बैठे है कहने […]

ज़िस्म मेरे की खुशबू ने किया था पागल तुझको या मेरी रूह की महक ने किया था दीवाना तुझको उठा कर देख ख़ुद का आइना, फिर बता खुद्को   तेरी बेचैनियों से मिल जाएगी शायद […]

ना पीना आता है मुझको ना पीने की रिवायत आती है सिर्फ इतना मालूम है मुझको जो भी पिलाए ख़ुद के दिल से उस दिलदार पे जान जाती है                          …… यूई

किनारे खेलते से लहरों से कभी जाने कब बीच समुंदर आ गए खेल खेल में पता ही ना चला कब जिंदगी के यह मंज़र आ गए                          …… यूई

ना पीने की कसम खायी थी मैंने फिर क्यों ना जाने मैं कैसे पी गया बदले रंग जमाने ने कुछ इस कदर के ना चाहते हुए भी मैं पी गया                           …….. यूई

बा-अदब बे-हिसाब हूँ पीता फिर पूछते हो क्यों हूँ पीता नशा तेरे इश्क का है इतना सख्त तोड़ने को उसका सरुर मैं हूँ पीता                          …….. यूई

मोहब्बत तेरी इतनी भरी है ज़ज़्बातो में मेरे वक्त कम ना रह जाए कहीं निभाने के लिए डर इसीमें मालिक से एक मरजी माँगी अपनी मरने के बाद निभाने की रिवायत माँगी अपनी                                         …….. […]

बेइंतेहा दर्दो को सहने की, अश्कों को पीने की सांसो की घुटन में रहने की, गमों में जीने की आदतें सारी यह किस किस की ग़ुलाम हो गई यह ज़िन्दगी तो बस मौत का दूसरा […]

शय नही कोई मुकम्मल इस जहां में कमी ढूंढ़ोगे जो एक किसी शय में दिखेंगी हजार तुम्हे वो उस शय में खुशी ढूंढ़ोगे जो तुम उसी शय में देगी वोह शय लूटा ह्ज़ार तुमपे                     […]

मेरा हर रोज़ तुझको याद करना रोज़ तुझको ख़ुदकी याद दिलाना यही हैं मोहब्बत की चँद रसमें जो साल दर साल निभायी हैं मैंने                       …… यूई

जिस्म और रूह की कश्मकश में रूह इश्क जिस्म से कहीं ज्यादा लगा बैठी रूह मेरी पिरो कर मेरे ज़ज़्बातो को खुदमें बन गले का हार तेरा, ख़ुद को सजा बैठी                                    …… यूई

सुनते थे गहन मुश्किलों में साया भी छोड़ देता है साथ रात के अँधेरे स्याह साय में मुड़ देखा ना था साया कहीं जब ख़ुद के होने का शक़ हुआ दाएँ हाथ से पकड़ बाईं […]

प्यार की यह अनमोल खुशियाँ मिलती कहां है ऐसी कलियाँ ए दिल से भरे दिलदार मेरे है तुझसे ज़िन्दगी में बहार मेरे                  …… यूई 

कोई क्यों मेरे लिए परेशान रहे कोई क्यों मेरे लिए आरजुमंद रहे ख़ुदकी आरजु सबकी ख़ुद घेरे रहे किसके पास किसके लिए वक्त रहे                           …… यूई 

क्यों घिरी ही अजीब सी कश्मकश में रही हो सोच, पाऊँ या छोड़ दूँ प्यार को बना नही वह तराजू जो तोले प्यार को कौनसे बाज़ार में जा तुम यह तुलवाओगी                                    …… यूई