सुखी बंजर
सुखी बंजर भूमि करें पुकार, वृक्ष लगाकर करो श्रृंगार । भूमण्डल का बिगड़ा संतुलन, वृक्षों से ही है सबका जीवन।। महेश गुप्ता जौनपुरी
सुखी बंजर भूमि करें पुकार, वृक्ष लगाकर करो श्रृंगार । भूमण्डल का बिगड़ा संतुलन, वृक्षों से ही है सबका जीवन।। महेश गुप्ता जौनपुरी
रूखी सूखी खाकर भी अमृत का पान कराती है। वो तो गैया मैया है अपनी जो हर विपदा से बचाती है।।
देवव्रत का भीष्मप्रतिज्ञा या धृतराष्ट्र का अंधापन। गंधारी के आँखों की पट्टी या कुन्ती का अबलापन।। किसको दोषी कहूँ मैं आखिर सब हैं कारण महाभारत…
जिम्मेदार किसे ठहराया जाय आखिर महाभारत के युद्ध का। उत्तर मांग रहा तत्काल हमार ये कैसा धर्मयुद्ध प्रबुद्ध का।।
वटसावित्री का पूजन किया बड़गद की टहनी रोपकर। वृक्षराज को देकर कलेश कैसी पूजा है ये शोकहर।।
तप रही धरा को सुसज्जित फिर से करना है, वृक्षारोपण करके धरा को हरा भरा बनाना है। वृक्षारोपण का संकल्प इंसा को लेना होगा, वायुमंडल…
सोचा था जो वो पुरा ना हो सका बदलते हालात को देख मैं अपना ना हो सका आंखों के आंसूओं को मैं अपने पोंछ ना…
निष्काम ना बैठ मन तू कर सृजन, तू कर सृजन गूंज बन भंवरा जगत में कर गुन्जन तू कर गुन्जन
बचपन पर ना डालो इतना बोझ, खेल कूद उत्पात मचा लेने दो। याद करके अपने बचपन को, बच्चों को मौज कर लेने दो ।। ✍महेश…
किसान अपने परिवेश को छोड़, खुद को कलंकित नहीं है करता। खून पसीने को बहाकर अपने, देश से गद्दारी नहीं है चाहता ।। ✍महेश गुप्ता…
किसान अपने परिवेश को छोड़, खुद को कलंकित नहीं है करता। खून पसीने को बहाकर अपने, देश से गद्दारी नहीं है चाहता ।। ✍महेश गुप्ता…
किसान जंग जब छेड़ता है, सरकार घुटने टेकता है । मनवा कर अपना सारा शर्त किसान, सरकार का अक्ल ठिकाने लगा देता है।। ✍महेश गुप्ता…
भ्रष्टाचार के जंजीरों में ना जकड़ो सरकार, किसान को किसान ही रहने दो मेरे सरकार। अलाप नहीं रोना मुझको नेता के पकड़ पांव, खून पसीने…
अन्न की कद्र जाने किसान, खेत को पुजे समझ भगवान। पैसे वाले कद्र क्या जाने अन्न का, उनके अन्दर समां गया है शैतान।। ✍महेश गुप्ता…
खेत को जोतकर बो ही देता, हो कितना भी परेशान किसान। फंड को तांक में रखकर किसान, मेहनत करके अन्न उगाता किसान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बच्चों की किलकारी पर बोझ लाद रहे हैं हम, नन्हें-मुन्हें मासूम पर जिम्मेदारी लाद रहे हैं हम। अपनी नाकामी को साबित करके महान बने हम…
भार के आगोश में सजा काट रहा है, बचपन अपना भूल कर समझदार बन रहा है। किताबी संसार को अपना जीवन समझ रहा है, बदलते…
चमकते बादल का दर्द किसान से पुछो, हवा के झोंके का हाल किसान से पुछो। कितना दर्द हैं देता ओलावृष्टि का मार, टूटे हुए सपनों…
अस्त ब्यस्त लस्त में भी खुद को जिंदा रखता, खून पसीने को बहाकर खेत हरा भरा रखता। प्रकृति के हालातों से कभी नहीं झुकता, मेहनत…
कितनी भी सिढीयां चढ़ लो, खाने के लिए मेरा है अन्न । खुद को महान भले ही समझो, पैसे से कर्ज नहीं अदा होता सुन।।…
शिक्षा और शिक्षक का नाता है भरा बस्ता, ज्ञान की बातों में छुपा है कोई रास्ता। भारी बस्ते से आमदनी है होता, बचपन के बोझ…
तन मन की शक्ति आती है योग साधना से, दिल को चैन आता है भगवान के आराधना से, योग वेद पुराण का अलौकिक उपहार है,…
सरकारी बाबू बनकर है बैठे, गरिब मजदूर से पैसे हैं ऐंठे । नमक हलाल से बचाये भगवान, अफसर के भेष में है दलाल बैठे।। ✍…
पैसे के लोभ में इंसान खुद को भूल गया, अफसर के ओहदे में सुख को भूल गया। चन्द रूपये के लालच में खुद को बेच…
करो योग सुबह और शाम, रहो निरोग करके व्यायाम। मन तन की शक्ति परख कर, जीवन में अपने करो आराम।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
पैसे का इमान देता नहीं कभी साथ, गरिबी अमीरी छोड़ कर मिलाओ हाथ। अफसर बनकर भगवान तुम नहीं हुए, सद्भाव गलत कर्मो को माफ करो…
मां ये देखो कैसा चांद निकल आया है, बादलों के गर्भ में चांद देखो समाया है। अंधेरे रात में आज चांद रोशनी भूल आया है,…
तुम्हारी ये सुनहरी जुल्फें और तुम्हारी याद, चेहरे की हंसी और दमकता हुआ ये चांद। मुझे याद बहुत आता है तुम्हारा साथ, रब से करना…
चांद को छिपाकर बादल, तारों की चमक छिन लिया। धरा को करके अन्धेरा, चांद की रोशनी छिन लिया।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
मन तन की शक्ति को पहचान, भेजो यारों दोस्ती का पैगाम । चेहरे की सुंदरता में फंसकर, ना करो अपना समय बर्बाद।। ✍ महेश गुप्ता…
चांद को पाना सबके बस की बात नहीं, चांद को ख्वाब में देखना हसरत की बात है। चांद का रोशनी रोशन करता है जहां को,…
पैसे का इमान देता नहीं कभी साथ, गरिबी अमीरी छोड़ कर मिलाओ हाथ। अफसर बनकर भगवान तुम नहीं हुए, सद्भाव गलत कर्मो को माफ करो…
तन मन से करो प्रात: काल योग, भाग जायेंगे तुम्हारे सारे रोग । मन तन दिल खिला खिला रहेगा, सदियों तक रहोगे तुम निरोग ।।…
भ्रष्टाचार की पोटली खोल रहें हैं अफसर, कुछ इमानदारी से कर रहे हैं उजागर। कुछ टेबल के नीचे से कर रहे हैं पार्सल, घी रोटी…
योग एक अलौकिक छाया है, दूर करता लोगों का काया है। रोग दोष को दूर हैं करता, मन मस्तिष्क को तेज हैं करता।। ✍महेश गुप्ता…
चोर चोर मौसेरे भाई, नेता अफसर दोनों लिप्त, एक चुराता एक बचता, इसी में है दोनों विलुप्त।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मां की ममता बड़ी निराली, बच्चों की करती है रखवाली। एक एक दान चुग कर लाती, अपने बच्चों को खिलाती।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
सरकार बेचारी फिसड्डी हो गयी, जनता अब मारी मारी है फिरती। लगकर लाईन में उम्मीद लगाएं, कोरोना का प्रकोप इन्हें है डसती।। ✍ महेश गुप्ता…
मां की ममता पिता का दुलार, दिखता है पशु पक्षी में भी । दाने चुग कर लाती है मां, भरण पोषण करती बच्चों का भी।।…
किस किस पर आरोप लगाते, अपने दुःख दर्द को किसे दिखाते । सरकार फिसड्डी बरसों से है, कब तक हम आवाज उठाते।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अपनी गलती कब तक हम ठेलेंगे, विज्ञान के आड़ में कब तक बम फोड़ेंगे। चुनौतियों से पिछा छुड़ा कर, अपनी नाकामी से कब तक हम…
कितनी भी सिढीयां चढ़ लो, खाने के लिए मेरा है अन्न । खुद को महान भले ही समझो, पैसे से कर्ज नहीं अदा होता सुन।।…
बेहिसाब अहसासों को हम सिमटे कैसे कहां हो पाता है मुकम्मल मकां-ए-नज्म मिरा हर बार टूट जाते है अहसास, ख्वाबों के जैसे
जिस नारी को समझ पातकी पति ने पत्थर बना दिया था। दे निज चरणन की धूल रामजी पंचकन्याओं में सजा दिया था।। प्रातकाल उठि सुमिरन…
पति ने पत्थर बना दिया था एक जीती जागती नारी को। परमेश्वर ने फिर नारी कर डाला निज चरणन अधिकारी को।।
दादाओं के भी दादा थे वो ना जाने कितने युगों से खड़े थे एक पाँव पर अपने घर के पास। खेल कबड्डी गिल्ली डंडे भाग…
शिक्षा और शिक्षक का नाता है भरा बस्ता, ज्ञान की बातों में छुपा है कोई रास्ता। भारी बस्ते से आमदनी है होता, बचपन के बोझ…
रोटी के निवाले के लिए बचपन अपना खो दिया, भूख की तड़प से मासूम बेचारा रो दिया। दिन रात एक करके लगा है देखो पैसा…
नशे की लत ने बर्बाद है किया, हंसते खेलते घर को बर्बाद है किया। खुशियों का गला घोंटकर देखो, अपनी मंजिल को ही नजर अंदाज…
नशे की लत में डूब गया देखो इंसान, धुम्रपान के चक्कर में हुआ बर्बाद, एक एक पैसे के लिए हुआ परेशान, जीवन अपना नशे में…
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