ए मन, ज़रा थम. तू चला है… थाम के, अपनी पतवार… नदी तो, बहती रहती, जो सतत् , चाहे जैसे भी हों रास्ते… कंकरीले.. पथरीले… पतवार ना छूटे, हाथों से… तू कौन?? तेरा वजूद क्या?? […]

कम्बख़त तसव्वुर तेरी की जाती नहीं है। भरी महफिल भी मुझे अब भाती नहीं है। जिंदगी तो अब बेसुर-ताल सी होने लगी, नया तराना भी कोई अब गाती नहीं है। पुकारूं कैसे, अल्फ़ाज़ हलक में […]

एक खुशबु सी बिखर जाती है मेरे इर्द गिर्द जब याद आते हैं मुझे मेरे मित्र जब भी मन विचलित होता है किसी अप्रिय घटना से घंटो सुनते रहते हैं वो मेरी बकबक चाहे रात […]

याद आती है उनकी मौजूदगी के दिन, सुबह की मीठी चाय से शुरू होते थे वे दिन, बात बात पर मुझे चिढाना उनका , मेरा रूठना और फिर मुझे मनाना उनका, रोज नए नाम से […]

याद आती है उनकी मौजूदगी के दिन, सुबह की मीठी चाय से शुरू होते थे वे दिन, बात बात पर मुझे चिढाना उनका , मेरा रूठना और फिर मुझे मनाना उनका, रोज नए नाम से […]

आसमान में उगता सूरज दिखता है , स्वर्णिम भारत का सपना, फिर सच्चा होता दिखता है। हुकुमत शाही अफसरों ने त्यागी, कर्म योग की अब है बारी, सरकारी तंत्र सुधरता दिखता है । स्वर्णिम भारत […]

कवि तो खुशिया फैलाने का जरिया था पर अब ऐसा वक्त आ गया कागज़- कलम को छोड़ सबने लेपटॉप कंप्यूटर को अपना लिया लिखने का कीमती वक्त तो Whats up twiter खा गया उंगलियां you […]

तुम्हें चांद कहूं, नहीं, तुम उससे भी हंसीन हो। तुम्हें फूल कहूं, नहीं, तुम उससे भी कमसीन हो। तुम्हें नूर कहूं, नहीं, तुम उससे ज्यादा रौशन हो। तुम्हें बहार कहूं, नहीं, तुम सावन का मौसम […]

मोबाइल नहीं जादू है यह , विज्ञान का कमाल है यह , हुआ न होता आविष्कार मोबाइल का तो, सोचो दुनिया कितनी पीछे होती, दूर से हम एक दूसरे से बातें ना करते , हमारी […]

तेरे कांधे पर, सर रख सोना चाहता हूँ। तेरे आगोश में, सब कुछ खोना चाहता हूँ। जन्नत सुना था, तेरी बाँहों में देख भी लिया, दो जिस्म और एक जान होना चाहता हूँ।

दिल से दिल तक अपना रस्ता बना लेती है, ये हिंदी ही हम सबको अपना बना लेती है।। हो जाए गर नाराज़गी तो मस्का लगा देती है, बातों हो बातों में साथी से रब्ता बना […]

जो बढ़ रहा है हाथ नापाक उसे तोड़ना होगा, हाथ मिलाया था जो बेशक उसे छोड़ना होगा, रच लिए बखूबी प्रपंच और चढ़ लिए ढेरों मंच, अब उतर कर जंग में इनका सर फोड़ना होगा, […]

कौन कहता है के मेरे होने से एक शहर बस्ता है, जहाँ निकल जाऊं मुझे मिलता एक बन्द रस्ता है, सांस मुझे आती नहीं या हवाओं ने रुख बदला है, महसूस करो तो ज़रा सच […]

जाओ तुम्हें माफ़ किया मैंने बस इतना सुकून है जैसा तुमने किया वैसा नहीं किया मैंने जाओ तुम्हें माफ़ किया मैंने हाँ खुद से प्यार करती थी मैं ज़रूर पर जितना तुमसे किया उस से […]

जब कभी ,अकेले बैठकर , किसी पुरानी बात पर मुस्कुराएंगे। तब आप ,अपनी उन्मुक्त हंसी पर, खुद ही चौक जाएंगे। दिले किताब से धूल झाड़ कर तो देखिए , बस एक पन्ना जरा पढ़ कर […]

उठी है एक आवाज, सत्ता को पलटने के लिए, जागी है एक भावना,जन जन की चेतना के लिए, गूंजी है एक पुकार,कुछ बदलने के लिए, अब समाप्त करनी है लोगों में फैली जो है भ्रांति, […]

आओ एक ख्वाब बुने कल के वास्ते, सबकी अपनी अलग है मंज़िल पर एक है रास्ते, कुछ तो अलग करेंगे कुछ तो नया करेंगे अपने देश के वास्ते, चलो आज ही तय कर लेते है […]

कहने को है अमृत की धारा, कूड़े से पटा हुआ उसका जल सारा । पाप धुलने का मार्ग बन गई गंगा, हर किसी के स्पर्श से मैली हो गई गंगा । कभी प्रसाद की थैली […]

विरासत ———- दादा का बजता ग्रामोफोन ,कानों में गूंजा करता है । वह आज भी घूमा करता है आंखों के रोशन दानों में, संगीत की धुन सुनते सुनते , कब समा गया. .. संगीत मधुर… […]

दादा का बजता ग्रामोफोन ,कानों में गूंजा करता है । वह आज भी घूमा करता है आंखों के रोशन दानों में, संगीत की धुन सुनते सुनते , कब समा गया. .. संगीत मधुर… इन कानों […]

कौन कहता है के मेरे होने से एक शहर बस्ता है, जहाँ निकल जाऊं मुझे मिलता एक बन्द रस्ता है, सांस मुझे आती नहीं या हवाओं ने रुख बदला है, महसूस करो तो ज़रा सच […]

मुस्किल हुआ दिल को समझाना मुस्किल हुआ रूठोंं को मनाना कितना बदल गया ये ज़माना पर हम ना बदल पाएँ पर हम ना बदल पाएँ तुझसे बिछड़ के ज़िंदा हूँ ये मेरी फूटी किस्मत है […]

मीठी मीठी झंकार सी, कानों में रस घोलती, मैं हूं राष्ट्रभाषा हिंदी, स्वीकार किया सब ने मुझे, हू मातृभाषा हिंदी, फिर भी जताने को वर्चस्व अपना,क्यों बोलते हो अंग्रेजी, वह तो भाषा है विदेशी, मैं […]

बड़े मायूस होकर, तेरे कूचे से हम निकले। देखा न एक नज़र, तुम क्यों बेरहम निकले। तेरी गलियों में फिरता हूँ, एक दीद को तेरी, दर से बाहर फिर क्यों न, तेरे कदम निकले। घूरती […]

*** दोस्ती हो तो ऐसी कि उसके मुक़ाबिल पुश्तैनी दुश्मनी भी फ़ीकी पड़ जाये…. दोस्त के बिना रहा न जाये अगर दोस्त मिल जाए तो कुछ और न भाये…. **** @deovrat 15.09.2019

सशक्त है कमजोर नहीं, पत्थर है केवल मोम नहीं। विद्वती है बुद्धि हीन नहीं , बेड़ियों में अब वो जकड़ी नहीं। आधुनिक है ,संकीर्ण नहीं, संस्कृति संस्कारों से हीन नहीं। हक पाना लड़ना जानती हैं […]

*** पतित पावनी हरित धरा पर जिस दिन से आँखें खोली हैं। कानों में शहद घोलती सी ये अपनी मातृभाषा की बोली है।। बचपन में वो अध्यापक जी जब श्याम पटल पर लिखते थे। कुछ […]

सख्सियत को अपने टटोल रहें अंग्रेजी में हिंदी का गुणगान करते छिप कर बैठे है ए बी सी डी में अपने मासूम परिंदों को हिंदी का ज्ञान दो सर्वश्रेष्ठ भाषा का वाणी पर मृदु भाष […]

“हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ” क्या सुनाऊँ मैं, हिंदी की व्यथा। वर्तमान सत्य है, नहीं कोई कथा। आजकल के बच्चे A B C D… तो फर्राटे से हाँकते हैं। ‘ककहरा’ पूछ लो तो बंगले झाँकते […]

दिल से दिल तक अपना रस्ता बना लेती है, ये हिंदी ही हम सबको अपना बना लेती है।। हो जाए गर नाराज़गी तो मस्का लगा देती है, साथी हो या मांझी सबको रस्ता बता देती […]

सभी मित्रों को हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ जाने कहां जा रही आज की पीढ़ी, नए नए ढंग है इनके, नई नई सोच है इनकी, नया जमाना अब है इनका, साड़ी सलवार पुरानी हो चुकी […]

राष्ट्रभाषा हिंदी —————– है शान मेरी, पहचान मेरी , देवो के स्वर सी, ज्ञानमयी। हम जन्मे है इस भूमि पर , जहां देवनागरी बोली है। कई भाषाओं की हमजोली है। जग में देती है मान […]

क्या है जीवन !! सोचो तो उलझ सी जाती हूं । जितना सुलझाना चाहती हूं , ओर -छोर नहीं पा पाती हूं। बालक का जन्म, घर में रौनक, घर किलकारियों से गूंज मान। नटखट सी […]

साज़ …….. बुझती… बंद होती.. यादो की मोमबत्तीयाँ…. दे जाती हैं याद… आज भी मधुरिमा। याद रह जाते हैं …कुछ शब्द…गूंज बनके… कहकहे हवाओं में गूँजते हैं साज़ बनके।। निमिषा …….।

भटके राही क्यू भटके हो??क्यू बिखरे हो?? क्यू बहके हो??क्यू खोये हो?? टुकङे जो देश के कर दोगे, कत्ल उम्मीदो का कर दोगे। बरबादी देश की करके तुम, ममता की छाया क्या पाओगे?? दो जख़ […]

मातृ दिवस :::::::::::::::: माँ जैसा …कोई ना जग में, तोल तराजू ..रख सब इसमें। तब भी पलड़ा …पार ना आये, ममता की ..कीमत ना पाये। ममता का हैं ..मोल निराला, एक हँसी.. जग वारा सारा. […]

370 तो झांकी है, पीओके अभी बाकी है, चला था कश्मीर लेने वो, अब तो उसे खुद की साख बचानी है, दर-दर की खाकर ठोकरे, लौट के आया बुद्धू घर पर, अब तो उसे पर […]

कुछ ऐसा कर जाएंगे, सारा शहर देखेगा। मेरे शहर का, अब हर एक बशर देखेगा। मेरे सितारे भी चमकेंगे एक दिन यकीनन, गुज़रूं जहां से, हर शख्स एक नज़र देखेगा। कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश […]

शमा और लौ ———- नवयोवना शमा और चमकती लौ एक साथ जीवन,लेकिन कहानी दो। लौ अपनी तेजी बढ़ाती गई, शमा को हर घड़ी दबाती गई। साथ तो दिया! पर हाय री धोखेबाज, शमा को , […]

पुकारता साहिल समंदर का, मत दूर जा ओ लहरें मुझसे, लहरें कहां सुनी साहिल की, वह तो चली जाती है दूर, खुद को तन्हा पाकर,होता है पछतावा उसे, जब वो निकल आती है दूर , […]

झूठे लोग बिना दर्द के भी आंसू बहाते है सच्चे लोग दुसरो का दर्द देखके ही रोने लग जाते है झूठे लोग दुख का बहाना बनाते है सच्चे लोग दुखो मे भी मुस्कुराते है

होली आई रे, आई रे ,होली आई रे। यादों की धूल उड़ाती सी , खूनी मंजर दोहराती सी, चहरों की फीकी रंगत पर रंगों का जामा चढ़ाती सी फिर देखो होली आई है। मन मस्त […]