आओ एक ख्वाब बुने कल के वास्ते, सबकी अपनी अलग है मंज़िल पर एक है रास्ते, कुछ तो अलग करेंगे कुछ तो नया करेंगे अपने देश के वास्ते, चलो आज ही तय कर लेते है […]

कहने को है अमृत की धारा, कूड़े से पटा हुआ उसका जल सारा । पाप धुलने का मार्ग बन गई गंगा, हर किसी के स्पर्श से मैली हो गई गंगा । कभी प्रसाद की थैली […]

विरासत ———- दादा का बजता ग्रामोफोन ,कानों में गूंजा करता है । वह आज भी घूमा करता है आंखों के रोशन दानों में, संगीत की धुन सुनते सुनते , कब समा गया. .. संगीत मधुर… […]

दादा का बजता ग्रामोफोन ,कानों में गूंजा करता है । वह आज भी घूमा करता है आंखों के रोशन दानों में, संगीत की धुन सुनते सुनते , कब समा गया. .. संगीत मधुर… इन कानों […]

कौन कहता है के मेरे होने से एक शहर बस्ता है, जहाँ निकल जाऊं मुझे मिलता एक बन्द रस्ता है, सांस मुझे आती नहीं या हवाओं ने रुख बदला है, महसूस करो तो ज़रा सच […]

मुस्किल हुआ दिल को समझाना मुस्किल हुआ रूठोंं को मनाना कितना बदल गया ये ज़माना पर हम ना बदल पाएँ पर हम ना बदल पाएँ तुझसे बिछड़ के ज़िंदा हूँ ये मेरी फूटी किस्मत है […]

मीठी मीठी झंकार सी, कानों में रस घोलती, मैं हूं राष्ट्रभाषा हिंदी, स्वीकार किया सब ने मुझे, हू मातृभाषा हिंदी, फिर भी जताने को वर्चस्व अपना,क्यों बोलते हो अंग्रेजी, वह तो भाषा है विदेशी, मैं […]

बड़े मायूस होकर, तेरे कूचे से हम निकले। देखा न एक नज़र, तुम क्यों बेरहम निकले। तेरी गलियों में फिरता हूँ, एक दीद को तेरी, दर से बाहर फिर क्यों न, तेरे कदम निकले। घूरती […]

*** दोस्ती हो तो ऐसी कि उसके मुक़ाबिल पुश्तैनी दुश्मनी भी फ़ीकी पड़ जाये…. दोस्त के बिना रहा न जाये अगर दोस्त मिल जाए तो कुछ और न भाये…. **** @deovrat 15.09.2019

सशक्त है कमजोर नहीं, पत्थर है केवल मोम नहीं। विद्वती है बुद्धि हीन नहीं , बेड़ियों में अब वो जकड़ी नहीं। आधुनिक है ,संकीर्ण नहीं, संस्कृति संस्कारों से हीन नहीं। हक पाना लड़ना जानती हैं […]

*** पतित पावनी हरित धरा पर जिस दिन से आँखें खोली हैं। कानों में शहद घोलती सी ये अपनी मातृभाषा की बोली है।। बचपन में वो अध्यापक जी जब श्याम पटल पर लिखते थे। कुछ […]

सख्सियत को अपने टटोल रहें अंग्रेजी में हिंदी का गुणगान करते छिप कर बैठे है ए बी सी डी में अपने मासूम परिंदों को हिंदी का ज्ञान दो सर्वश्रेष्ठ भाषा का वाणी पर मृदु भाष […]

“हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ” क्या सुनाऊँ मैं, हिंदी की व्यथा। वर्तमान सत्य है, नहीं कोई कथा। आजकल के बच्चे A B C D… तो फर्राटे से हाँकते हैं। ‘ककहरा’ पूछ लो तो बंगले झाँकते […]

दिल से दिल तक अपना रस्ता बना लेती है, ये हिंदी ही हम सबको अपना बना लेती है।। हो जाए गर नाराज़गी तो मस्का लगा देती है, साथी हो या मांझी सबको रस्ता बता देती […]

सभी मित्रों को हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ जाने कहां जा रही आज की पीढ़ी, नए नए ढंग है इनके, नई नई सोच है इनकी, नया जमाना अब है इनका, साड़ी सलवार पुरानी हो चुकी […]

राष्ट्रभाषा हिंदी —————– है शान मेरी, पहचान मेरी , देवो के स्वर सी, ज्ञानमयी। हम जन्मे है इस भूमि पर , जहां देवनागरी बोली है। कई भाषाओं की हमजोली है। जग में देती है मान […]

क्या है जीवन !! सोचो तो उलझ सी जाती हूं । जितना सुलझाना चाहती हूं , ओर -छोर नहीं पा पाती हूं। बालक का जन्म, घर में रौनक, घर किलकारियों से गूंज मान। नटखट सी […]

साज़ …….. बुझती… बंद होती.. यादो की मोमबत्तीयाँ…. दे जाती हैं याद… आज भी मधुरिमा। याद रह जाते हैं …कुछ शब्द…गूंज बनके… कहकहे हवाओं में गूँजते हैं साज़ बनके।। निमिषा …….।

भटके राही क्यू भटके हो??क्यू बिखरे हो?? क्यू बहके हो??क्यू खोये हो?? टुकङे जो देश के कर दोगे, कत्ल उम्मीदो का कर दोगे। बरबादी देश की करके तुम, ममता की छाया क्या पाओगे?? दो जख़ […]

मातृ दिवस :::::::::::::::: माँ जैसा …कोई ना जग में, तोल तराजू ..रख सब इसमें। तब भी पलड़ा …पार ना आये, ममता की ..कीमत ना पाये। ममता का हैं ..मोल निराला, एक हँसी.. जग वारा सारा. […]

370 तो झांकी है, पीओके अभी बाकी है, चला था कश्मीर लेने वो, अब तो उसे खुद की साख बचानी है, दर-दर की खाकर ठोकरे, लौट के आया बुद्धू घर पर, अब तो उसे पर […]

कुछ ऐसा कर जाएंगे, सारा शहर देखेगा। मेरे शहर का, अब हर एक बशर देखेगा। मेरे सितारे भी चमकेंगे एक दिन यकीनन, गुज़रूं जहां से, हर शख्स एक नज़र देखेगा। कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश […]

शमा और लौ ———- नवयोवना शमा और चमकती लौ एक साथ जीवन,लेकिन कहानी दो। लौ अपनी तेजी बढ़ाती गई, शमा को हर घड़ी दबाती गई। साथ तो दिया! पर हाय री धोखेबाज, शमा को , […]

पुकारता साहिल समंदर का, मत दूर जा ओ लहरें मुझसे, लहरें कहां सुनी साहिल की, वह तो चली जाती है दूर, खुद को तन्हा पाकर,होता है पछतावा उसे, जब वो निकल आती है दूर , […]

झूठे लोग बिना दर्द के भी आंसू बहाते है सच्चे लोग दुसरो का दर्द देखके ही रोने लग जाते है झूठे लोग दुख का बहाना बनाते है सच्चे लोग दुखो मे भी मुस्कुराते है

होली आई रे, आई रे ,होली आई रे। यादों की धूल उड़ाती सी , खूनी मंजर दोहराती सी, चहरों की फीकी रंगत पर रंगों का जामा चढ़ाती सी फिर देखो होली आई है। मन मस्त […]

आज कल ओझल हो गयी है हिंदी एसे महिलाओं के माथे से बिंदी जैसे कभी जो थोड़ा बहुत कह सुन लेते थे लोग अब उनकी शान में दाग हो हिंदी जैसे लगा है चसका जब […]

मै हूँ देश का युवा आतंकवाद को जवाब दे के रहूँगा मेरे देश के लिए दिलमे नफरत रखने वालो के सीने मे गोलियाँ उतार दूंगा ऐ पाकिस्तान तू मेरा नाम जान ले अपना परिचय तो […]

खबरें खुलकर बेशुमार हर रोज़ इश्तेहार में डालते हैं, दिलओ दिमाग के किस्से बेगुनाह बाज़ार में डालते हैं, मार पीट गैंग रेप मडर मदर-फादर को भी लपेट कर, आये दिन छत की मुँडेर पर कभी […]

हाँ ये सच है, कई बार हुआ है प्यार मुझे हर बार उसी शिद्दत से हर बार टूटा और सम्भ्ला उतनी ही दिक्कत से हर बार नया पन लिये आया सावन हर बार उमंगें नयी, […]

हमारी रूह पर क़ब्ज़ा जमाने आ गई फिर से। ये लड़की प्यार में पागल बनाने आ गई फिर से।। , हमारे कब्र का रसता किसी से पूँछकर शायद। वो पागल नींद से हमको जगाने आ […]

क्या सोचके निकले थे, और कहाँ निकल गये हैं ७२ साल में आज़ादी के, मायने ही बदल गये हैं आज मारपीट, दहशत और बलात्कार आज़ादी है पथराव, लूटपाट, आगजनी, भ्रष्टाचार आज़ादी है आरक्षण और अनुदान […]

कल कालेज के एक पुराने मित्र से मुलाकात हो गयी देख कर भी नहीं पहचाना, कुछ अजीब बात हो गयी मैं बोला, क्यों भाई, पुराने यारों से याराना तोड़ लिया कालेज के मोटू से आज, […]

कौन हूँ मैं, और क्या वजूद है मेरा। जहाँ में क्या पहचान मौजूद है मेरा। शायद ऊँचा कोई मुकाम पा न सका, और कोई नहीं, ये कसुर खुद है मेरा। गर कोई पूछे, क्या हासिल […]

पहले खयाल ए ख्वाब भी आस-पास न थे, आज तुमसे मिलके ज़िन्दगी ख्वाब हो गई है॥ चन्द जवाब थे मगर सवाल आस-पास न थे, आज तुमसे मिलके ज़िन्दगी सवाल हो गई है।। राही अंजाना

तुम छुपे हो कहां तुझे ढूंढूं मैं यहा….. बिना तेरे जीवन मेरा अधूरा यहां, तेरी यादों का दीपक मैं जलाऊं यहां , आ जाओ तो फिर एक बार तुम यहां , तुम छुपे हो कहां […]

मैं तेरे प्रेम में कृष्णा,अपना नाम कर दूंगी, जो तू न आया तो तेरी याद में सुबह शाम कर लूगी, मैं राधा नही मीरा नहीं मैं भी एक योगन हूं, तेरी मुरली की धुन सुनने […]

बढ़ती उम्र का मतलब ये नहीं कि इंसान जीना छोड़ दे सारे काम बन्द कर मौत का इंतज़ार करना शुरू कर दे सेवानिवृति एक पड़ाव है जहां थोड़ा कुछ बदल जाता है थोड़ा पीछे छूट […]

कोई बारिश से कहदे, उसको हद में रहना होगा गर बरसना है तो हमारी शर्तों पर बरसना होगा बेलगाम, बेखौफ, बेवक्त कहीं भी यूं बरस पड़ना और झमाझम बरस के सड़कों पर हंगामा करना ये […]

सुन सदा मेरी, वो चल निकले। मेरे अपने ही संगदिल निकले। जिन पे भरोसा किया था हमने, वो भी साजिशों में शामिल निकले। ना रही कोई उम्मीद उनसे अब, मेरे जज़्बातों के, वो कातिल निकले। […]

सारे पिंजरे तोड़ चुका वो . मन की मर्जी से जीता है. कवि तो उड़ता पंछी है जो उमंगो के आसमान मे उड़ता है कवि तो बहुत ही प्यासा है बस भावनाओ मे बहती नदी […]

जो सब लोग की कहन है कहन कर रहा हूँ मैं, किसी को क्या पता कितने जतन कर रहा हूँ मैं, बड़ा छोटा सबका तो सम्मान रखा करता हूँ मैं, आते जाते हर किसी को […]

मेरी छाँव मे जो भी पथिक आया थोडी देर ठहरा और सुस्ताया मेरा मन पुलकित हुआ हर्षाया मैं उसकी आवभगत में झूम झूम लहराया मिला जो चैन उसको दो पल मेरी पनाहो में उसे देख […]