रुह जिसकी बिक चुकी है, दिल के जज्बात वो क्या जाने। इंसानियत भी जो बेच चुका, गम की बात वो क्या जाने। खुशियों का लुटेरा है जो, खुशियों की सौगात वो क्या जाने। दूसरों के […]

बेटियां रोशन हर घर जहां जन्म लेती हैं बेटियां 👩‍🎓 🧑होती हैं दो कुलों की रक्षक यह बेटियां 👩‍🔬 घर-भर की रौनक ये खिलखिलाती बेटियां👩‍🚒 भाई पर लुटाती जान भी ये बेटियां🧒👧 दो परिवारों के […]

गुनाह साबित भी न हुआ, गुनहगार कहलाया गया मैं। सीने से लगाया भी गया, फिर बार बार ठुकराया गया मैं। कई बार तोड़ा फिर जोड़ा गया, फिर जोड़ कर बनाया गया मैं। कभी जुगुनू आँखों […]

बहुत बुलाया मगर वो मेरी कही सुनी सब टाल गया, प्रेमपत्र जो पढ़े लिखे थे वो आँगन में सब डाल गया, कौन घड़ी में जाने कब आके घर में दीपक बाल गया, सूनी मन पुस्तक […]

ये जिस्म है, ये जिस्म ही न पिघल जाये कहीं, किसी चराग की शरारत से न जल जाये कहीं, मैं चमकता रहा हूँ उसीकी गर्म रौशनी से यारों, मुझको मेरा ही ये भरम न निगल […]

इस बार घट स्थापना वो ही करे जिसने कोई बेटी रुलायी न हो वरना बंद करो ये ढोंग नव दिन देवी पूजने का जब तुमको किसी बेटी की चिंता सतायी न हो सम्मान,प्रतिष्ठा और वंश […]

मां ओ मां, तुझ से प्यारा, तुझ से न्यारा , होगा कोई न और दूजा, भोली भाली सूरत तेरी, ममता तेरी आंखों से झड़ती, शीतल पवन सा तेरा प्यार, तेरी गोद है जन्नत का द्वार […]

बेशक दौलत बेशुमार नहीं कमाया है। मगर मेरे सर पर, बुजुर्गों का साया है। ज़हां की दौलत कम है, मेरे खजाने से, दुआओं का खजाना, मेरा सरमाया है। हादसा सर से गुजर गया, मैं बच […]

माँ बाप की क्या इच्छा होती है अपने बच्चों से थोड़ा सा प्यार थोड़ी सी इज्जत चाहते है उन गढ़े पक्के रिश्तो से दुख के दिनों मे तुम साथ दो ना दो तुम्हारे साथ सुख […]

मां क्या-क्या दुख सहती है, हर फरमाइश पूरी करती है । हर हुकुम बजाती रहती है, खुद से बेपरवाह रहती। बच्चों की चिंता करती है , अलार्म क्लॉक सी जगती है अपने सपनों को छोड़ […]

पाषाण युग दिखावे की संस्कृति , दिखावे का प्यार। प्रचार पाने को , हर कोई तैयार। कैसा यह संसार ! बदलता बातें पल पल सच बन जाता झुठ यहां हर कदम कदम पर पत्थर से […]

इश्क आंखों में डूबा रहता है, रोम- रोम में रहता है। लबों को छूकर जाता है , जग में तन्हा कर जाता है। सरगोशी सी कर जाता है, गुपचुप सी हंसी दिलाता है। जाने क्या […]

कर्म ही पूजा और न दूजा , किस्मत का दरवाजा। किया कर्म तो सोई किस्मत का खुल जाए ताला। भाग्य बदल कर रख दो अपना , कर्म करो और साथ लो अपना। रेखाओं पर गर […]

मेरे दर्द को तेरा अफ़साना याद है। मेरे ज़ख़्म को तेरा ठुक़राना याद है। ख़ींच लेती है तलब मुझको पैमाने की- हर शाम साक़ी को मेरा आना याद है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

शाम फिर खिसक कर, निगाहों में आ गयी बांते कुछ उभरकर, आंखों में छा गयीं अब रात हो रही है, मैं कहाँ ही अकेला हूँ मैं हूँ, और लंबी रातें हैं, यादों का लंबा मेला […]

ना उठाया शस्त्र कभी ना हिंसा अपनाई थी , अंत समय पर उनके राष्ट्र में खामोशी छाई थी ; सौराष्ट्र प्रांत का संत वहां था , राष्ट्रप्रेम उसका अनंत था ; देकर आजादी बापू कहलाया […]

आज का यह समाज, चक्रव्यू है पुराने गले सढ़े रिवाजों का, लड़ अभिमन्यु की तरह, अपनी सोच का समाज पे प्रहार कर, सुन ली सब की आज तक, ना रहा वक्त अब लिहजो का, खौफ […]

दो रोटी देने को तुमको, रह जाता है भूखा वो; दूध-दही देने को तुमको, खा लेता है सुखा वो, कभी बारिश कभी जाड़े में; फसल हो जाती हैं चौपट, माँगता है बस मेहनताना; नहीं माँगता […]

जब भी तुम्हें लगे की तुम्हारी परेशानियों का कोई अंत नहीं मेरा जीवन भी क्या जीना है जिसमे किसी का संग नहीं तो आओ सुनाऊँ तुमको एक छोटी सी घटना जो नहीं है मेरी कल्पना […]

भूखा प्यासा नन्हा सा बालक, सड़क किनारे बैठा था वो, फटे थे तन पर कपड़े उसके, मांग कर खाना ही फितरत थी उसकी, ममता उसे नसीब न थी, मां बाबा कहकर किसी को पुकारा भी […]

भूखा प्यासा नन्हा सा बालक, सड़क किनारे बैठा था वो, फटे थे तन पर कपड़े उसके, मांग कर खाना ही फितरत थी उसकी, ममता उसे नसीब न थी, मां बाबा कहकर किसी को पुकारा भी […]

आजकल के कुछ नेता जनता को क्यों मूर्ख समझते, बुनियादी मुद्दों से हटकर राजनीति का रंग देते, धर्म और जाति को लेकर राजनीति का रंग देते, कभी मंदिर तो कभी मस्जिद कर हवाओं को गर्म […]

ये दुनिया बनता एक अखाड़ा है। हर कोई लिए हथियार खड़ा है।। कभी मजहब के नाम फसाद। तो कभी सबब ज़मीं जायदाद। हर एक, दूसरे से बड़ा है। हर कोई लिए हथियार खड़ा है। ये […]

वाह री सरकार क्या गजब बनाए है तूने ट्रेफिक रूल. दिमाग मे बस चलता रहता हेलमेट, इंश्योरेंश, लाइसेंस कभी ना मै जाऊ भूल. वाह री सरकार सब्सिडी तो तूने give up करा दी पर सिलेंडर-चूल्हा […]

सारथी ना जीत में ना हार में हैं मजा बस प्यार में कदम कदम बढाये चलो राह से ना तुम हटो हे बलशाली हे दयावान सत्य वचन पर‌ डटे रहो कलयुग कि धारा को अन्ततः […]

सूरज चंदा नभ ये तारे, कितने लगते प्यारे ये नजारे , मन मारे हिलकोरे, चलू सूरज चंदा तारों के द्वारे, सूरज की चमक से चंदा चमके , अपनी ही चमक से चमके ये तारे. नीला […]

दोस्ती भगवान का प्रसाद है, दोस्ती अल्लाह की इबादत है , दोस्ती बारिश की फुहार है, दोस्ती फूलों का हार है, दोस्ती तितलियों की रंगत है, दोस्ती फूलों की महक है, दोस्ती झरनों का संगीत […]

रात के छम सन्नाटे में, एक भय की आहट है। घबराहट की दस्तक है कोई है का एहसास है कल क्या होगा की सोच है । बीते कल जो जिंदगानिया शां त थी, आज उनमें […]

धरती मां के बेटे सुन, हो गया मां से एक अपराध सुन, कि उन्होंने तुम्हें जन्म दिया, लिया नहीं बस दिया, धरती मां के बेटे सुन हो गया तुमसे अपराध सुन , कि तूने इस […]

आज मानव खुद को ही, विनाश की ओर है धकेल रहा , लालच और फरेब का, चारों तरफ जाल है बुन रहा , खुद को सबसे आगे, रखने की होर में , दूसरे को पैरों […]

तुझ में पाया था प्रेम बहुत , सार्थक लगता था जीवन कुछ, आंखों में प्रेम की बारिश थी, कुछ कही- अनकही गुजारिश थी । मन भीग गया तन भीग गया, ऐसी वो सुहानी बारिश थी। […]

देर मिलता है, पर मिलता जरूर है। किस्मत पे अपने, इतना तो गुरूर है। खामोशी मेरी, लगने लगी कमजोरी, रहम दिल हूं, बस इतना कुसूर है। छत है सर, फिर भी हूं बेघर, घर जिनके […]

थक चूका हूँ , पर हारा नहीं हूँ मैं निरंतर चलता रहूँगा आगे बढ़ता रहूँगा उदास हूँ ,मायूस हूँ पर मुझे जितना भी आज़मा लो , मैं टूटूँगा नहीं , मैं निरंतर कोशिश करता रहूंगा, […]

ज़िन्दगी तेरा शुक्रिया, प्यारी सी सुबहे दी तारों भरे आसमां का आंचल दिया खुशनुमा, हवाओं से सरोबार् जो किया…. सोने चांदी के चम्मच ना सही धूप की चुनौतियों भरे रास्तों पे.. चलने का साहस ,जो […]

ज़िन्दगी तेरा शुक्रिया, प्यारी सी सुबहे दी तारों भरे आसमां का आंचल दिया खुशनुमा, हवाओं से सरोबार् जो किया…. सोने चांदी के चम्मच ना सही धूप की चुनौतियों भरे रास्तों पे.. चलने का साहस ,जो […]

तुम नदिया सी. . .. मैं वृक्ष हरा.. तुम जलधारा, मैं तरस रहा। तू मस्त मगन लहराती सी, बहती जाती इठलाती सी। गहरी कत्थई सी, आंखों में अपना ही अक्स ढूंढता हूं । खुद को […]

फिर कांप उठी धरती माता , अब और नहीं बस और नहीं । कितना कुछ मुझ पर लादोगे, हूं दबी घुटी पर और नहीं। सांसे लेना दुश्वार हुआ, कोने कोने पर वार हुआ, हर जगह […]

फिर कांप उठी धरती माता , अब और नहीं बस और नहीं । कितना कुछ मुझ पर लादोगे, हूं दबी घुटी पर और नहीं। सांसे लेना दुश्वार हुआ, कोने कोने पर वार हुआ, हर जगह […]

रिश्तो की क्या है परिभाषा ? क्या मान है? क्या है मर्यादा ? बीती बातें युग बीत चले, रिश्ते मानों को भी खो चले। रिश्तो में ना अब वह सच्चाई है । ना पहले जैसी […]

हम ज़िन्दग़ी में ग़म को कब तक सहेंगे? हम राह में काँटों पर कब तक चलेंगे? क़दम तमन्नाओं के रुकते नहीं मग़र- हम मुश्क़िले-सफ़र में कब तक रहेंगे? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तमन्ना थी हम देशवासियों की, ऐसा हो कोई प्रधानमंत्री हमारा, गर्व हो जिस पर हम सबका, हां, आप में पाया वह सब गुण हमने, उच्च शिखर तक भारत को है पहुंचाया आपने, भारत क्या दुनिया […]

तमन्ना थी हम देशवासियों की, ऐसा हो कोई प्रधानमंत्री हमारा, गर्व हो जिस पर हम सबका, हां आप में पाया वह सब गुण हमने, उच्च शिखर तक भारत को है पहुंचाया आपने, भारत क्या दुनिया […]