शाम फिर खिसक कर, निगाहों में आ गयी बांते कुछ उभरकर, आंखों में छा गयीं अब रात हो रही है, मैं कहाँ ही अकेला हूँ मैं हूँ, और लंबी रातें हैं, यादों का लंबा मेला […]
शाम फिर खिसक कर, निगाहों में आ गयी बांते कुछ उभरकर, आंखों में छा गयीं अब रात हो रही है, मैं कहाँ ही अकेला हूँ मैं हूँ, और लंबी रातें हैं, यादों का लंबा मेला […]
ना उठाया शस्त्र कभी ना हिंसा अपनाई थी , अंत समय पर उनके राष्ट्र में खामोशी छाई थी ; सौराष्ट्र प्रांत का संत वहां था , राष्ट्रप्रेम उसका अनंत था ; देकर आजादी बापू कहलाया […]
आज का यह समाज, चक्रव्यू है पुराने गले सढ़े रिवाजों का, लड़ अभिमन्यु की तरह, अपनी सोच का समाज पे प्रहार कर, सुन ली सब की आज तक, ना रहा वक्त अब लिहजो का, खौफ […]
दो रोटी देने को तुमको, रह जाता है भूखा वो; दूध-दही देने को तुमको, खा लेता है सुखा वो, कभी बारिश कभी जाड़े में; फसल हो जाती हैं चौपट, माँगता है बस मेहनताना; नहीं माँगता […]
जब भी तुम्हें लगे की तुम्हारी परेशानियों का कोई अंत नहीं मेरा जीवन भी क्या जीना है जिसमे किसी का संग नहीं तो आओ सुनाऊँ तुमको एक छोटी सी घटना जो नहीं है मेरी कल्पना […]
भूखा प्यासा नन्हा सा बालक, सड़क किनारे बैठा था वो, फटे थे तन पर कपड़े उसके, मांग कर खाना ही फितरत थी उसकी, ममता उसे नसीब न थी, मां बाबा कहकर किसी को पुकारा भी […]
भूखा प्यासा नन्हा सा बालक, सड़क किनारे बैठा था वो, फटे थे तन पर कपड़े उसके, मांग कर खाना ही फितरत थी उसकी, ममता उसे नसीब न थी, मां बाबा कहकर किसी को पुकारा भी […]
आजकल के कुछ नेता जनता को क्यों मूर्ख समझते, बुनियादी मुद्दों से हटकर राजनीति का रंग देते, धर्म और जाति को लेकर राजनीति का रंग देते, कभी मंदिर तो कभी मस्जिद कर हवाओं को गर्म […]
ये दुनिया बनता एक अखाड़ा है। हर कोई लिए हथियार खड़ा है।। कभी मजहब के नाम फसाद। तो कभी सबब ज़मीं जायदाद। हर एक, दूसरे से बड़ा है। हर कोई लिए हथियार खड़ा है। ये […]
उठो खड़े हो जाओ वीर तुम, लड़ लड़ कर अपना अधिकार लो, दुम दबाकर डर के मारे, ज़िन्दगी भर लागान मत दो, महेश गुप्ता जौनपुरी
वाह री सरकार क्या गजब बनाए है तूने ट्रेफिक रूल. दिमाग मे बस चलता रहता हेलमेट, इंश्योरेंश, लाइसेंस कभी ना मै जाऊ भूल. वाह री सरकार सब्सिडी तो तूने give up करा दी पर सिलेंडर-चूल्हा […]
सारथी ना जीत में ना हार में हैं मजा बस प्यार में कदम कदम बढाये चलो राह से ना तुम हटो हे बलशाली हे दयावान सत्य वचन पर डटे रहो कलयुग कि धारा को अन्ततः […]
सूरज चंदा नभ ये तारे, कितने लगते प्यारे ये नजारे , मन मारे हिलकोरे, चलू सूरज चंदा तारों के द्वारे, सूरज की चमक से चंदा चमके , अपनी ही चमक से चमके ये तारे. नीला […]
दोस्ती भगवान का प्रसाद है, दोस्ती अल्लाह की इबादत है , दोस्ती बारिश की फुहार है, दोस्ती फूलों का हार है, दोस्ती तितलियों की रंगत है, दोस्ती फूलों की महक है, दोस्ती झरनों का संगीत […]
रात के छम सन्नाटे में, एक भय की आहट है। घबराहट की दस्तक है कोई है का एहसास है कल क्या होगा की सोच है । बीते कल जो जिंदगानिया शां त थी, आज उनमें […]
धरती मां के बेटे सुन, हो गया मां से एक अपराध सुन, कि उन्होंने तुम्हें जन्म दिया, लिया नहीं बस दिया, धरती मां के बेटे सुन हो गया तुमसे अपराध सुन , कि तूने इस […]
आज मानव खुद को ही, विनाश की ओर है धकेल रहा , लालच और फरेब का, चारों तरफ जाल है बुन रहा , खुद को सबसे आगे, रखने की होर में , दूसरे को पैरों […]
तुझ में पाया था प्रेम बहुत , सार्थक लगता था जीवन कुछ, आंखों में प्रेम की बारिश थी, कुछ कही- अनकही गुजारिश थी । मन भीग गया तन भीग गया, ऐसी वो सुहानी बारिश थी। […]
बीते लम्हों की बारिश है , इन आंखों से गुजारिश है , यह खुली किताब ना बन जाए , मुझको रुसवा ना कर जाए निमिषा सिंघल
देर मिलता है, पर मिलता जरूर है। किस्मत पे अपने, इतना तो गुरूर है। खामोशी मेरी, लगने लगी कमजोरी, रहम दिल हूं, बस इतना कुसूर है। छत है सर, फिर भी हूं बेघर, घर जिनके […]
थक चूका हूँ , पर हारा नहीं हूँ मैं निरंतर चलता रहूँगा आगे बढ़ता रहूँगा उदास हूँ ,मायूस हूँ पर मुझे जितना भी आज़मा लो , मैं टूटूँगा नहीं , मैं निरंतर कोशिश करता रहूंगा, […]
ज़िन्दगी तेरा शुक्रिया, प्यारी सी सुबहे दी तारों भरे आसमां का आंचल दिया खुशनुमा, हवाओं से सरोबार् जो किया…. सोने चांदी के चम्मच ना सही धूप की चुनौतियों भरे रास्तों पे.. चलने का साहस ,जो […]
ज़िन्दगी तेरा शुक्रिया, प्यारी सी सुबहे दी तारों भरे आसमां का आंचल दिया खुशनुमा, हवाओं से सरोबार् जो किया…. सोने चांदी के चम्मच ना सही धूप की चुनौतियों भरे रास्तों पे.. चलने का साहस ,जो […]
तुम नदिया सी. . .. मैं वृक्ष हरा.. तुम जलधारा, मैं तरस रहा। तू मस्त मगन लहराती सी, बहती जाती इठलाती सी। गहरी कत्थई सी, आंखों में अपना ही अक्स ढूंढता हूं । खुद को […]
फिर कांप उठी धरती माता , अब और नहीं बस और नहीं । कितना कुछ मुझ पर लादोगे, हूं दबी घुटी पर और नहीं। सांसे लेना दुश्वार हुआ, कोने कोने पर वार हुआ, हर जगह […]
फिर कांप उठी धरती माता , अब और नहीं बस और नहीं । कितना कुछ मुझ पर लादोगे, हूं दबी घुटी पर और नहीं। सांसे लेना दुश्वार हुआ, कोने कोने पर वार हुआ, हर जगह […]
रिश्तो की क्या है परिभाषा ? क्या मान है? क्या है मर्यादा ? बीती बातें युग बीत चले, रिश्ते मानों को भी खो चले। रिश्तो में ना अब वह सच्चाई है । ना पहले जैसी […]
हम ज़िन्दग़ी में ग़म को कब तक सहेंगे? हम राह में काँटों पर कब तक चलेंगे? क़दम तमन्नाओं के रुकते नहीं मग़र- हम मुश्क़िले-सफ़र में कब तक रहेंगे? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तमन्ना थी हम देशवासियों की, ऐसा हो कोई प्रधानमंत्री हमारा, गर्व हो जिस पर हम सबका, हां, आप में पाया वह सब गुण हमने, उच्च शिखर तक भारत को है पहुंचाया आपने, भारत क्या दुनिया […]
तमन्ना थी हम देशवासियों की, ऐसा हो कोई प्रधानमंत्री हमारा, गर्व हो जिस पर हम सबका, हां आप में पाया वह सब गुण हमने, उच्च शिखर तक भारत को है पहुंचाया आपने, भारत क्या दुनिया […]
Mam दोस्ती ही तो है एक ऐसा रिश्ता है जो जिंदगी के एक रंग में भी कई रंग दिखाता है । वरना बिना दोस्तों के रंगीन जिंदगी भी बेरंग सी नजर आती है ॥ Mam […]
धूप,आज कुछ, सरक आयी, मेरे आंगन में…. और, बिखेर गई, मुठ्ठी भर अबीर…… …. कविता मालपानी
ए मन, ज़रा थम. तू चला है… थाम के, अपनी पतवार… नदी तो, बहती रहती, जो सतत् , चाहे जैसे भी हों रास्ते… कंकरीले.. पथरीले… पतवार ना छूटे, हाथों से… तू कौन?? तेरा वजूद क्या?? […]
कम्बख़त तसव्वुर तेरी की जाती नहीं है। भरी महफिल भी मुझे अब भाती नहीं है। जिंदगी तो अब बेसुर-ताल सी होने लगी, नया तराना भी कोई अब गाती नहीं है। पुकारूं कैसे, अल्फ़ाज़ हलक में […]
एक खुशबु सी बिखर जाती है मेरे इर्द गिर्द जब याद आते हैं मुझे मेरे मित्र जब भी मन विचलित होता है किसी अप्रिय घटना से घंटो सुनते रहते हैं वो मेरी बकबक चाहे रात […]
याद आती है उनकी मौजूदगी के दिन, सुबह की मीठी चाय से शुरू होते थे वे दिन, बात बात पर मुझे चिढाना उनका , मेरा रूठना और फिर मुझे मनाना उनका, रोज नए नाम से […]
याद आती है उनकी मौजूदगी के दिन, सुबह की मीठी चाय से शुरू होते थे वे दिन, बात बात पर मुझे चिढाना उनका , मेरा रूठना और फिर मुझे मनाना उनका, रोज नए नाम से […]
आसमान में उगता सूरज दिखता है , स्वर्णिम भारत का सपना, फिर सच्चा होता दिखता है। हुकुमत शाही अफसरों ने त्यागी, कर्म योग की अब है बारी, सरकारी तंत्र सुधरता दिखता है । स्वर्णिम भारत […]
कवि तो खुशिया फैलाने का जरिया था पर अब ऐसा वक्त आ गया कागज़- कलम को छोड़ सबने लेपटॉप कंप्यूटर को अपना लिया लिखने का कीमती वक्त तो Whats up twiter खा गया उंगलियां you […]
तुझे भूल न पाई अब तक, आंखों में तुम बसे हो अब तक, आंखों में तेरी थी समंदर की गहराई, जो भूल न पाई अब तक, बातों में तेरी थी झरनों की सरगम, जो कानों […]
तुझे भूल न पाई अब तक आंखों में तुम बसे हो अब तक आंखों में तेरी थी समंदर की गहराई जो भूल न पाई अब तक बातों में तेरी थी झरनों की सरगम जो कानों […]
तुम्हें चांद कहूं, नहीं, तुम उससे भी हंसीन हो। तुम्हें फूल कहूं, नहीं, तुम उससे भी कमसीन हो। तुम्हें नूर कहूं, नहीं, तुम उससे ज्यादा रौशन हो। तुम्हें बहार कहूं, नहीं, तुम सावन का मौसम […]
मोबाइल नहीं जादू है यह , विज्ञान का कमाल है यह , हुआ न होता आविष्कार मोबाइल का तो, सोचो दुनिया कितनी पीछे होती, दूर से हम एक दूसरे से बातें ना करते , हमारी […]
तेरे कांधे पर, सर रख सोना चाहता हूँ। तेरे आगोश में, सब कुछ खोना चाहता हूँ। जन्नत सुना था, तेरी बाँहों में देख भी लिया, दो जिस्म और एक जान होना चाहता हूँ।
दिल से दिल तक अपना रस्ता बना लेती है, ये हिंदी ही हम सबको अपना बना लेती है।। हो जाए गर नाराज़गी तो मस्का लगा देती है, बातों हो बातों में साथी से रब्ता बना […]
जो बढ़ रहा है हाथ नापाक उसे तोड़ना होगा, हाथ मिलाया था जो बेशक उसे छोड़ना होगा, रच लिए बखूबी प्रपंच और चढ़ लिए ढेरों मंच, अब उतर कर जंग में इनका सर फोड़ना होगा, […]
कौन कहता है के मेरे होने से एक शहर बस्ता है, जहाँ निकल जाऊं मुझे मिलता एक बन्द रस्ता है, सांस मुझे आती नहीं या हवाओं ने रुख बदला है, महसूस करो तो ज़रा सच […]
जाओ तुम्हें माफ़ किया मैंने बस इतना सुकून है जैसा तुमने किया वैसा नहीं किया मैंने जाओ तुम्हें माफ़ किया मैंने हाँ खुद से प्यार करती थी मैं ज़रूर पर जितना तुमसे किया उस से […]
जब कभी ,अकेले बैठकर , किसी पुरानी बात पर मुस्कुराएंगे। तब आप ,अपनी उन्मुक्त हंसी पर, खुद ही चौक जाएंगे। दिले किताब से धूल झाड़ कर तो देखिए , बस एक पन्ना जरा पढ़ कर […]
उठी है एक आवाज, सत्ता को पलटने के लिए, जागी है एक भावना,जन जन की चेतना के लिए, गूंजी है एक पुकार,कुछ बदलने के लिए, अब समाप्त करनी है लोगों में फैली जो है भ्रांति, […]
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