नजरों में मुहब्बत और वाणी में मधुरिमा चाहिए इंसान ने इंसानियत को साथ रखना चाहिए। साँस ईश्वर की अमानत है समझना चाहिए, साँस रहने तक उसे नेकी निभानी चाहिए। दूसरे की साँस में अवरोध बिल्कुल […]

अगर निराशा है कहीं, दूर करो तत्काल, मन में अपने जोश को, सदा रखो संभाल। सदा रखो संभाल, जोश में जोश न खोना, आप हमेशा आग नहीं शीतलता बोना। कहे लेखनी नहीं, निराशा में रहना […]

निन्दारत रहना नहीं, निंदा जहर समान, निन्दारत इंसान का, कौन करे सम्मान। कौन करे सम्मान, सभी दूरी रखते हैं, निन्दारत को देख, सब मन में हंसते हैं। कहे लेखनी छोड़, मनुज निंदा की बातें, अपने […]

बेकारी पर आप कुछ, नया करो सरकार, युवाजनों को आज है, राहत की दरकार। राहत की दरकार, उन्हें, वे चिंता में हैं, पायेंगे या नहीं नौकरी शंका में हैं। कहे ‘लेखनी’ दूर, करो उनकी आशंका, […]

ठिठोली करो तुम खूब लेकिन दिल दुखाओ मत किसी का, जोर से गाओ मगर मत चैन लूटो तुम किसी का। किसी बीमार की जब रात को आँखें लगी हों मुश्किलों से जोर से डीजे बजाकर […]

सदा को कौन रहता है यहां इस जमीं में समय करके पूरा चले जाते सब हैं। तेरा व मेरा सभी कुछ यहीं पर रह जाता है कुछ नहीं साथ जाता। न आने का मालूम न […]

15 जनवरी की पावन तिथि, सेना दिवस है आज चलो शपथ ले, कल पर छोङे न कोई काज। आत्मनिर्भर बनें, परनिर्भरता का करें त्याग नयी नीति से करें आने वाले पलों का आकाज । अपने […]

खुशियां सदा अमावस की रात की आतिशबाजी की तरह आईं मेरे जीवन में… जो बस खत्म हो जाती है क्षण भर की जगमगाहट और उल्लास देकर… और बाद में बचता है तो एक लंबा सन्नाटा […]

मेरे घर के सामने वाले पड़ोसी ने, अपने घर की इमारत ऊंची उठाई। घर उनका है मैं कुछ कह भी ना पाई, पर मेरे आंगन की धूप हवा और चांदनी ने मुझसे शिकायत लगाई, फ़िर […]

15 जनवरी को हम थल सेना दिवस मनाएं, 73वें थल सेना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं तिरंगे की शान हैं सैनिक, भारत का मान हैं सैनिक, पूरी रात जो जागे सीमा पर, उसी का नाम है […]

फेंक रहे थे जब तुम खाना, मैं भोजन की आस में थी। रोटी संग सब्जी जी भी है क्या, मैं वहीं पास में थी। तुमने शायद देखा ना होगा, मैं काले मैले लिबास में थी। […]

समस्याएं बहुत हैं आपको मुँह खोलना होगा जरा बिंदास होकर आज तो कुछ बोलना होगा। गरीबी मिटाने के लगे जितने भी नारे हैं, उनको हकीकत में हमें अब तोलना होगा। बेरोजगारी से युवा हैं दर्द […]

मकरसंक्रांति अलग अंदाज लिए, हर प्रान्त में, अपनी छटा बिखेर रहा । सूर्य चले उत्तरायन हो छटा नव आशा की किरण बिखेर रहा । सकारात्मकता का संदेश लिए अपनी संस्कृति, अपनी परिवेश की झलक बिखर […]

आज कुछ गा लूँ मैं तुम्हें सुना लूँ मैं, गीत ही गीत में भुला कर के दिल में अपने बसा लूँ मैं। मिटा दूँ सब की सब गलतफहमी, सच्चा गायक हूँ यह बता दूँ मैं, […]

धीमी-धीमी धूप संग में, मीठी-मीठी खुशियां लाई। तिल, गज्जक की खुशबू लेकर, सर्दी में संक्रान्ति आई। मकर संक्रान्ति मनाना है, गंगा जी में नहाना है गंगा जी ना जा पाओ तो, घर में जरूर नहाना […]

चलो पतंग उड़ाएं लूट लें, काट लें पतंग उनकी सभी रंगीनियां अपनी बनायें चलो पतंग उड़ाएं चलो पतंग उड़ाएं। उनके चेहरे की खुशियों को चुराकर चलो आनंद मनायें चलो पतंग उड़ाएं। कटी पतंग दूसरे की […]

कविता -मकर संक्रांति चलो मनाए | मकर संक्रांति आई पतंग चलो उड़ाए | उड़े ऊंचाई जैसे सोच पेंच चलो लड़ाये | डोर पतंग की थाम खूब तुम रखना | कट न जाये उम्मीदे डोर चलो […]

आपको नींद आ गई आधी और हम गीत लिख रहे हैं अब क्या करें यह कलम भी चंचल है जागती तब है, सो गए जब सब। स्वप्न में भी मनुष्य की पीड़ा भाव को शिल्प […]

राग कहाँ रागिनी कहाँ मेरी इस सड़क पर लिखी कहानी है, दो घड़ी आप भी खड़े होकर देख लो क्या है मेरी कहानी है। लोहड़ी क्या, कई त्यौहार आये आपने खीर पुए खूब खाये मगर […]

ठोस के साथ हमें कुछ उदार रहना है अपनी आदत में हमें अब सुधार करना है। स्वहित के साथ हमें दूसरों के हित में भी थोड़ा रुझान रखना है मदद की तरफ बढ़ना है। जिन्हें […]

साँस है जब तलक तब तलक संघर्ष से जीतिये जहान पूरा जीत तक न बैठिए छोड़िए मत कुछ अधूरा। निकलिए राह में उठाइये कदम अपने, आज नहीं तो कल आपको मिलेगी मंजिल। थकिये मत, घबराइए […]

खुशियाँ अपार है प्यार का त्योहार है। वेहरे बीच आग जली लोहड़ी की बहार है।। गैया का गोबर पाथ-पाथ पाथी लिया बनाय। सुक्खा लक्कड़ काट-काट लोहड़ी लिया सजाय ।। घच्चक मूंगफली रेवड़ी संग खिल्लां का […]

क्या हुआ.. आज मौसम को, बादल ही बादल हैं गगन में, सूरज भी नहीं दिखा, सर्दी बढ़ती ही जा रही जाने क्या है इसके मन में, धूप का ना नामो-निशां कहां छिपी हैं सूर्य-रश्मियां, थोड़ी […]

थक चुका हू माँ मुझे सोने दे इस झूठे दुनिया से पक चुका हू मुझे अपने साथ ले ले स्वार्थ से चलते लोग मुखौटे पहने लोग सरल पेड़ कटते जाते है सरलता और मूर्खता मे […]

बेरोज़गारी बढ़ती ही जा रही है, सुरसा के मुख सम खुलती ही जा रही है। चयन हुआ पर नियुक्ति नहीं है, युवाओं की प्रतीक्षा बढ़ती ही जा रही है। दो-दो वर्ष से प्रतीक्षा कर रहे […]

ढोल बजाकर आग जला कर, आओ लोहड़ी मनाएं तिल गुड़ की बर्फी बना कर, सब मिलजुल कर खाएं सरसों का साग और मक्का की रोटी मक्खन संग खाओ, स्वादिष्ट बड़ी होती रंग बिरंगी पतंग उड़ाएं […]

वो पुरानी गिटार पुरानी बाइक वो गली वो नुक्कर वो चौबारे वो बेहतर ज़िन्दगी बनाने के सपने कोई छीन नहीं सकता वोह जज़्बा आगे आने का वो खुली आँखों के सपने वो रात के तारे […]

जीवन का दर्द लिखो कहती है कलम आज बोलो कहती है उपेक्षित-शोषित-उत्पीड़ित की आवाज बनो कहती है। प्यार-मुहब्बत पर लिखता हूँ रोमांचित होने लगता हूँ, जैसे ही रमने लगता हूँ कलम मुझे कहने लगती है, […]

वक्त मत हाथ से जाने देना वक्त को खूब भुना लेना तुम कभी आलस अगर आना चाहे उसको तुम पास मत आने देना। वक्त जब हाथ से निकल लेगा तब नहीं लौट कर वो आयेगा […]

कविता- क्या खोज रहे हो ——————————– क्या खोज रहे हो, कहाँ भटक रहे हो, अंदर सुख हैं- बाहर सुख नहीं हैं खुद को मजबूत बना हरदम लड़ अपने से, जिस दिन विजय तू पायेगा, ज्ञानेंद्रिय […]

कभी कोई कांटे बिछा दे राहों में, कांटे चुन-चुन के दूर कर दो। इस तरह बढ़ाओ आत्म-बल, कि अरि के स्वप्न चूर कर दो। अन्धकार कर दे कोई राहों में गर, तो जला मशाल तिमिर […]

ये सर्दी का मौसम, ये कोहरे का नज़ारा आज है ये आग्रह हमारा कोहरे में डूबी, यह सुन्दर-सुन्दर सुबह जी भर के जी लें, आओ ना एक कप चाय, क्यूं ना साथ-साथ पी लें.. _____✍️गीता

अच्छे लोगों का, अपनी ज़िन्दगी में आना, सौभाग्य कहलाए उन्हें संभाल कर रखना, कहीं जाने ना देना हमारी योग्यता कहलाए। अनेक कलाएं हैं इस जहां में, सबसे सुंदर कला क्या है किसी के हृदय को […]

ठंढी का मौसम आया है। संग मेरा मान बढ़ाया है ।। पुलकित होकर कहता चाय। बार – बार सब मांगते चाय।। कभी खुशी कम हो जाती है। जब बीच पकौड़ी आ जाती है।। झुंझला के […]

ख़यालातों के बदलने से भी, नया दिन निकलता है। सुनो, सिर्फ सूरज चमकने से, ही सवेरा नहीं होता। हां ठंड में थोड़ी धूप भी जरूरी है, बादलों के आने से अंधेरा नहीं होता।। ____✍️गीता

बड़े आदमी कब कहलाओगे तुम जमीं पर नजर जब रख पाओगे तुम। इंसानियत को बचाकर के मन में रख पाओगे जब बड़े आदमी तब कहलाओगे तुम। जब तक न दोगे दूजे को इज्जत जब तक […]

दगा करना सरल है वफ़ा करना कठिन है गिराना सरल है किसी को उठाना कठिन है। दिल जोड़ लेना और अपना बोल लेना सरल है, निभाना कठिन है। कुछ भी कह देना सरल है कर […]

पूँजी तेरे खेल निराले जिसकी जेब में भर जाती है उसका संसार बदल जाती है, धीरे-धीरे आकर तू मानव व्यवहार बदल जाती है। दम्भ, दर्प, मद, गर्व आदि संगी साथी ले आती है। तेरे आने […]

अमृत बेला है अतिपावन। उठो रे तू छोड़ विभावन।। हरि का सुमिरन कर लो रे। सैर करो तू सुबह -सबेरे।। शीतल मंद हवा सुखदाई। योग प्रणायाम करो रे भाई।। तन -मन को निर्मल कर लो। […]

अगर आपको है फिक्र, अपने आर्थिक और दैहिक उत्थान की, तो फ़िर बात सुनो एक काम की आप अपने भोर वाले मित्र बनाएं, जो आपके संग , नियमित रूप से सैर को जाएं प्रभु का […]

एक निर्जीव -सी मोटर गाड़ी । शानो शौकत की बनी सवारी।। ये भी मांगे तेल और पानी। घिस गए पुर्जे हुई पुरानी।। अपने जैसा वंदा अखीर। खीचे रिक्शा लगा शरीर ।। एक अकेला खींच रहा […]

बातें बताओ खुल कर क्यों इस तरह हो रूठे कहते थे प्यार दूँगा अब बन गए हो झूठे। बिन बात मुँह फुलाकर चुपचाप क्यों हो बैठे, क्या कह दिया है हमने जो इस तरह हो […]

अब मैं बड़ा हो गया हूं, पापा हो गए हैं बूढ़े निज परिवार में रमता जा रहा हूं, पापा को विस्मृत करता जा रहा हूं कुछ कम ही सुनता है उनको आजकल, कुछ कम ही […]

घमंड तेरा शत्रु है उसे कभी न पास रख तेरा करेगा अवनयन उसे कभी न पास रख। घमंड से कटेंगे तेरे मित्र और दोस्त सब, घमंड लील जायेगा ये आत्मीय भाव सब। तू शिखर को […]

कविता-विश्व पटल पर हिंदी चमके —————————————— विश्व पटल पर हिंदी चमके ऐसा राग सुनाता हूं, दुनिया भर के लोग सुनो क्यों हिंदी में कविता लिखता हूं, जब दुनिया में कोई भगवान नहीं हरि ने दुख […]

तुम्हारी नादानी थी बोलो उसकी क्या गलती थी वो पेट में खेला करती थी, बाहर आकर दुनिया देखूंगी मन में सोचा करती थी। वो कलिका अपने जीने के सपने देखा करती थी, तुम से मम्मा […]

हिन्दी केवल भाषा ही नहीं, मेरे वतन की पहचान है हिन्दी का है हृदय में स्थान, हिन्दी ही मेरा सम्मान है हिन्दी की गूंज हो देश विदेश, ऐसा मेरा अरमान है हिन्दी मेरे भावों की […]

अपने वतन की मिट्टी को, क्या कभी तू भुला पाएगा जिस आंगन में खेला-कूदा, क्या वो याद ना आएगा जिस विद्यालय कॉलेज से ली शिक्षा तुमने युवक क्या उसके प्रति भी, नतमस्तक ना हो पाएगा […]