समय चक्र

बचपन तो अब अतीत हो गया, जवानी ने भी जाने की जिद ठान ली। लाख जतन करते रहे कि शायद मान जाए, उसने तो मेरी…

जब शागिर्द-ए-शाम

जब शागिर्द-ए-शाम तुम हो, ख़्याल-ए-ख़ल्क़ 1 क्या करें, जुस्तुजू 2 ही नहीं किसी जवाब की जब, सवाल क्या करें। 1. दुनिया की परवाह; 2. तलाश।

शोक-ए-हिज्र

शोक-ए-हिज्र1 करूँ या फिर आज जश्न-ए-वस्ल2 करूँ उनके पलभर के आने-जाने में, जिंदगीभर का रसद3 था।   1. विरह का दुख; 2. मिलन का उत्सव;…

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दिल बहलता नहीं था

दिल बहलता नहीं था बहलाए रखा रात भर तेरी यादों में दीपक जलाए रखा रात भर। अंधेरा छटते ही तुझसे मुलाकात करेंगे इसी उम्मीद में…

अज़ीयत

आसान नहीं है हर दर्द को सीने से लगा कर ज़िंदा रहना, हमने खुद अपना गरेबान चाक किया है तब जाके ये हुनर ​​पाया है

फिर से..

वह पन्नों को पलटाके फिर एक बार देखा, जो सच्चाई से वाक़िफ न हुई थी। अश्क के उन अक्षरों को पढ़ा, जिन्हें तस्सली फिकी मुस्कान…

Aankh

आँख ऐसी कि कमल तुमसे निशानी मांगे , जुल्फ ऐसी कि घटा शर्म से पानी मांगे | हुस्न ऐसा कि अजंता का अमल याद आये,…

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