ITNA ACHACHA YA BURA NAHI HOON

इतना अच्छा या बुरा नहीं हूँ,
जितना कि दुनिया कहती है ।
मैं कैसा हूँ, ये सिर्फ व सिर्फ मैं जानता हूँ ।।
———————————————–
मैं खूद के सवालों के कठघड़े में सदा खड़ा रहता हूँ
औरों की नजरों में, मैं क्या हूँ, ये औरों का सवाल है,
मेरा नहीं, मैं क्या हूँ, ये सिर्फ व सिर्फ मैं जानता हूँ ।।
————————————————————–
जय श्री सीताराम
कवि विकास कुमार

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

सारी सृस्टि है सियाराम में समाई भज ले, भज ले तु प्रेम से सीताराम रे भाई ।

आकर चारी लाख चौरासी जाति जीव जल थल नभ वासी सीय राममय सब जग जानी करउ प्रणाम जोरी जुग पानी।। सारी सृस्टि है सियाराम में…

Responses

  1. मैं खूद के सवालों के कठघड़े में सदा खड़ा रहता हूँ
    औरों की नजरों में, मैं क्या हूँ, ये औरों का सवाल है,
    मेरा नहीं, मैं क्या हूँ, ये सिर्फ व सिर्फ मैं जानता हूँ ।।
    —- आदर्शात्मक स्थिति की बहुत सुंदर काव्य रचना। सुन्दर युवा सोच।

New Report

Close