बारिश के मौसम मे अकसर अदरक वाली चाय की खातिर…. हल्की सी एक “walk” लेकर… “कॉलेज” की “कैंटीन” तक हो आते थे दोनो… चाय क्या थी एक बहाना था तुम्हे जी भर के देख लेने […]

तुम आहिस्ता से पर्दे खोल देना सुबह खिड़की के…. मैं बन के धूप चौखट से तुम्हारी छन के आऊँगा… जब पंछी चहचायेंगे तुम्हारे घर के आँगन मे… जरा तुम गौर से सुनना मेरी आवाज मिलेगी… […]

सूना था वक़्त रुकता नहीं, बहता है, बदलता है, बस राह अपनी; जाने कब खो गए वो दिन प्यारे जाने कब छूट गए वो लोग सारे, बच गई तो बस कुछ एहसास न्यारी, रूठ गई […]

दीदार-ए-नजर जो हो गयी है! आज कयामत़ सी हो गयी है! हसीन लम्हों में उलझा हूँ मैं, जिन्दगी ख्वाबों में खो गयी है! जी रहा हूँ मैं तेरी यादों को लेकर! दर्द़ बन गया हूँ […]

तुम्हारे लब पर नाम मेरा जब आएगा! गुजरा हुआ मंजर तुमको नज़र आएगा! ‪ #‎बिखरे‬ हुए अफसाने घेरेंगे इसतरह, दर्द का समन्दर पलकों में उतर आएगा! Written By ‪#‎महादेव‬

मन तुम्हारा गीत सा , पावन सुरीला ! तन मधुर मकरंद से, आवेष्टित ! भाव का भ्रम जाल है, चारो तरफ! कामनाओं से भरी, मनुहार हो तुम! स्वप्न का संसार हो तुम !! आर्य हरीश […]

ღღ__ज़िन्दगी भी कुछ ऐसे ख्याल में गुजरी; जैसे शब्-ए-फुरकत किसी मलाल में गुजरी !! . जिसमें इश्क़, हो जाता है बे-वजह; वो उम्र तो बस, अभी हाल में गुजरी !! . क्यूँकर हसीन सपने, देख […]

इक नज़्म है जिसे हरपल गुनगुनाता हूँ कोरे कागज पै स्याही सा बिखर जाता हूँ हर्फ़ हालातों में ढलकत कुछ कह देते है कोई सुनता है तो मैं संवर जाता हूँ कोई साखी है तेरे […]

आँखे तुझ पर थम गई जब तुझको बहते देखा। सोच तुझमे रम गई जब तुझको सेहते देखा ।। अपनी कलकल लहरों से तूने प्रकृति को संवरा है। सबको शरण में लेती माँ तू तेरा ह्रदय […]

ये माना कि ; मैं तेरा ख्बाब नहीं हूँ । मगर फिर भी ; इतना ख़राब नहीं हूँ ।। नशे–सा मैं; चढ़ता–उतरता नहीं । सुराही सब्र की हूँ ; शराब नहीं हूँ ।। मुझे पता […]

फिर वही अफ़रा– तफ़री; उच्च—स्तरीय मीटिंग । गूंगे–बहरे–लाचारों की; देश के साथ :  चीटिंग ।। फिर कोरी धमकी की भाषा; रोज़ नया खु….. ला…..सा। फिर से मुर्दा चेहरे चमके; देते खूब दि….ला…..सा।। फिर बूढों के […]

रुकते नहीं वो काफिले कितने चले कितने रुके ये न हम से पूछिए चल पड़े जो बाँह थामें रुकते नहीं वो काफिले | अक्षरों को जोड़ने में हिस्सा हमारा भी रहा इस अधूरी पटकथा में […]

दिन आ रहे मधुमास के शीत है भयभीत खुशनुमा वातावरण ले रहा अँगड़ाइयाँ तोड़ हिम के आवरण कह गई कोकिला कान में कुहास के दिन आ रहे मधुमास के | गुनगुनी सी धूप होगी मधुभरी […]

वर्ष कलैंडर शाल हैं बदले ! किंतु न अपने हाल हैं बदले !! नये साल का शोर करो मत ! पेड़ों ने बस छाल हैं बदले !! थोड़ा चतुर हुई क्या मछली ! मछुवारों ने […]

वह भिखारी मलिन मटमैला फटा पट पहने था वह पथवासी नमित निगाहे नित पथ पर नयनों से नीर निकलता विदीर्ण करता ह्रदय अपने भाग्य पर कांपते हाथों में कटोरा स्कंध पर उसके परिवार का बोझ […]

सितम पे सितम तुम ढाते रहे अफ़साने मगर महोब्बत के बनते रहे लफ़्जों में कहां बयां होती है कहानी मेरी कर सको गर महसूस तो जानो किस कदर हम दरिया ए आग में जलते रहे… […]