बारिश बहुत है बाहर भीतर पड़ा है सूखा, खाता हूँ खूब चींजें फिर भी रहा हूँ भूखा। मन में उमड़ के बादल नैनों में खूब बरसा, चाहत हुई थी शायद ऐसा हुआ है शक सा।
बारिश बहुत है बाहर भीतर पड़ा है सूखा, खाता हूँ खूब चींजें फिर भी रहा हूँ भूखा। मन में उमड़ के बादल नैनों में खूब बरसा, चाहत हुई थी शायद ऐसा हुआ है शक सा।
नजरें टिकी हैं तुम पर कोशिश है भाव पढ़ लूँ पाने को पार मन का पत्थर की नाव गढ़ लूँ। उतरे या डूब जाये कोशिश कभी न छोडूँ तुम छोड़ना भी चाहो मन से कभी […]
एक मां ने पांच बेटों को पाला पांच बेटे मां को खिला न सके कितनी बदकिस्मत होगी वो मां जिसपे मिटी साथ निभा न सके बेटे के लिए कितने चक्कर लगाये मंदिर में निशदिन प्रसाद […]
प्रजापति दक्ष हो या हिरना कश्यप सा राजा विद्वान रावण हो या हो कौरव वंश का कुनबा इनके हनन का भी अहंकार ही बना संघारक । युगो युगो से अहंकारियों का क्या हश्र हुआ ? […]
ऐसे शक्ति पुंज कृष्ण जब शिशुपाल मस्तक हरते थे, जितने सारे वीर सभा में थे सब चुप कुछ ना कहते थे। राज सभा में द्रोण, भीष्म थे कर्ण तनय अंशु माली, एक तथ्य था निर्विवादित […]
ऐसे शक्ति पुंज कृष्ण जब शिशुपाल मस्तक हरते थे, जितने सारे वीर सभा में थे सब चुप कुछ ना कहते थे। राज सभा में द्रोण, भीष्म थे कर्ण तनय अंशु माली, एक तथ्य था निर्विवादित […]
आँसू को पोंछ लेना खुद को संभाल लेना, मजबूत करना मन को खुद को संभाल लेना। कमजोर पड़ यूँ कैसे जीवन चलेगा आगे, आशा हो पूरे घर की दायित्व भी हैं आगे। ईश्वर की जो […]
अश्कों के समंदर में ए खुदा मुझे सिर्फ दो गज ज़मीन दे दे। गर करने लगे वह अपनो से बेवफ़ाई तब,ज़माना मुझे उसी में दफ़ना दे।।
ऊँचाईयों के दौर में हर कोई ऊँचा उठना चाहे। विनयचंद इस दौर में आखिर पीछे रहते हो काहे।। कर्म करो ऊँचाई पाओ औरों को नाहीं गिराना तुम। जो गिरे हुए को उठाओगे कीर्ति यश वैभव […]
जिम्मेदारों!! यूँ उलझ कर आप आपस में भुला देते हो जनहित को। बिता देते हो ऐसे ही समय। खींचातानी गजब की है आपकी जो भूल कर आम जीवन के दर्दों को अलग मुद्दे उठाते हो […]
बन्धन में होना बाध्य नहीं अपितु एक स्वतंत्रता है विचारों की स्वतंत्रता, भावों की स्वतंत्रता, जीवन के अद्भुत अनुभवों की स्वतंत्रता, सागर के विशाल गर्भ में विचरण करने की स्वतंत्रता, नव- विटप के वातास होने […]
फिर मुझे याद कर रहा होगा फिर वो आँसू बहा रहा होगा उसके नैनों की झील से बहकर फिर कोई खत आ रहा होगा।।
जब ज़िन्दगी कर रही होगी अंत निर्धारित हमारी कहानियों का जब वक्त की धुंध छँट जायेगी और साफ़ नज़र आने लगेगा चेहरा मौत का..!! जब उम्मीदों के पखेरूओं को रिहाई देकर नियति के आगे नतमस्तक […]
फर्ज अपना निभाते चल ओ राही, बोल उत्साह के सुनाते चल ओ राही। दुःखी के पोछ आँसू जरा सा दे सहारा, गमों को दूसरों के मिटाते चल ओ राही। हर तरफ दुख ही दुख है […]
ये कैसा दौर है जहाँ विश्वास का भी कारोवार है हैसियत का पता नहीं पर पहुंचने पर बनता कर्जदार है एक समय था सबसे ज्यादा भरोसा डॉक्टर पर ही होता था भगवान से भी कहीं […]
काली मुलायम उड़ती जुल्फें तेरी, इश्कबाज़ों पे कयामत ढाती है। जब चले तू खुली वादियो में, घटा की नियत भी बदलती है।।
गुंजाइश ही नहीं थी कि चांद यूँ बदली में अपना मुँह छुपा लेगा, मुझे देखेगा और कुछ ना बोलेगा। मेरी नाउम्मीदी को नकार कर पूर्णिमा की अनघ चांदनी में संवर कर, चला गया वो घने […]
नारी के नवोन्मेष पर ————————– चाँद ने पलकें उठा कर देख तो लिया है अब~ पश्चिम से आते प्रकाश को, पर आधुनिका को यह स्वीकार्य नहीं है, कि धरा पर रहने वाले लोग ,यह कहें […]
खामोशियों को अपनी बस एक राज रहने दो आज कुछ मोहब्बत की बातें हो जायें, शिकायतों के पुलिंदे कल खोल लेना, आज रहने दो। अंधेरों की, उजालों की, बातें आज करते हैं, बड़ा गमगीन है […]
विश्व तम्बाकू निषेध दिवस:- जीवन में ये जहर क्यों घोलते हो अपने फेफडों को तुम धुयें से क्यों सेंकते हो छोंड़ दो तम्बाकू का सेवन करना सीख लो तंबाकू छोड़ कर जीना ये तुम्हारी सेहत […]
तंबाकू है इक मीठा जहर, जुबां पर गर चढ़ जाए, सेहत, स्वास्थ्य को हानि पहुंचा, मानव को मृत्यु द्वार तक ले जाए। चुटकी भर तंबाकू ने, हजारों बीमारियों को जन्म दिया, टीवी, अस्थमा,लंग कैंसर का, […]
खेल तो सब खेल सकता है । मगर ब्रह्मचारी कोई विरला ही हो सकता है ।। ब्रह्मचारी का मतलब ये नहीं कि वो शादी ना करें । बल्कि ब्रह्मचारी का मतलब ये हैःकि वो इन्द्रियों […]
दिल के कब्र में एक मर्तबा झाँक कर तो देख, मैं उम्मीद की चिराग जलाए बैठा हूँ। एक न एक दिन मुरादें होंगे पूरे मेरे, वर्षों से यही उम्मीद लगाए बैठा हूँ।। तेरी यादों के […]
साधक ब्रह्मचर्य का योगी कहलाता है । वह एक-ना-एक दिन खूद को जान लेता है हम कामी पुरूष सच में बहुत रोते है आखिर हम भी अंत में ब्रह्मचर्य ही अपनाते है ।।1।। ————————————————————– किसी […]
मेरा इंतज़ार एक पुल है असमर्थताओं के उस उफनते दरिया पर जो बह रहा है हम दोनों की दुनियाओं के बीच..! जिससे गुज़रकर एक दिन मेरी आँखों मे पलते मखमली सपनें उतरेंगे वास्तविकता के धरातल […]
क्यों लुटती हुई जिन्दगानी मिली है क्यों हर नब्ज़ आज पानी से भरी है बहुत रो लिये हम अंधेरों में जाकर क्यों हमको ये पीर की निशानी मिली है ना आँखों में अब रह गये […]
मेरी बेसुध, बेजान पड़ी रूह बेआबरू हुआ जिस्म आज फना हो रहा है जा रहा है अन्तरिक्ष की वृहद सैर पर, जीवन में कुछ लूटेरों मेरे वजूद को ही मार दिया मेरे औरत होने पर […]
जब कान्हा के होठों पे मुरली गैया मुस्काती थीं, गोपी सारी लाज वाज तज कर दौड़े आ जाती थीं। किया प्रेम इतना राधा से कहलाये थे राधेश्याम, पर भव सागर तारण हेतू त्याग चले थे राधे धाम। […]
नदियाँ- सागर, सहरा- पहाड़, पानी-प्यास, सूखा- बरसात, तितली-फूल, छाया- धूप पंछी- आकाश, जंगल- उजाड़ सबकी पीड़ाओं को आश्रय दिया है तुम्हारे हाथों ने कहो प्रेम! मेरे विस्थापित अश्रु अछूते क्यों हैं अब तक तुम्हारे हाथों […]
जख्मों को हमारे वह कुरेदते जा रहे हैं, कुछ इस तरह वह मुझे आजमा रहे हैं। मेरी रूह में सांस धुंधली हुई जाती, हम उनकी मोहब्बत के कर्जदार होते जा रहे हैं।
हे ईश्वर! उस दिवंगत आत्मा को शांति दे ममता की घनी छांव आज उदास हुई उस माँ की ममता को शक्ति प्रदान करे कोख का उजड़ जाना कैसे सहेगी वो, भला बेटी बिन अब कैसे […]
रोई तो होगी आज चांदनी भी, टपक के गिरी होगी जमीं पर बूंद बूंद बन के पिघली होगी वो हाय ! कैसे संभली होगी वो निराश नैन पथरा गये होंगे दिल के टुकड़े हो गए […]
ओ मेरी घृणित, उपेक्षित ईर्श्या! तू अभी जिंदा है!! मेरे पीर के तम में मेरे आज में कल में पर्वतों की विशालता सम तू अभी जिंदा है!! मेरे जीवन में उजास-सी किसी क्लेश की तलाश-सी […]
रुक गई सांस, भर आया हृदय दुख के सागर में मन डूब गया व्यथित हुआ भारी हुई पलकें तुझसे मिलने को मन छटपटाने लगा.. कैसे तुझसे अब कहूँ कुछ मैं कैसे तुझको अब संभालूँ मैं […]
तू जर्रों की तरह उड़कर मेरी सांसों में मिलता है ये मन योगी हुआ तन भस्म देखो मलता रहता है अन्तस में दिये जलते रोशनी आसमां तक हो पुष्प जोगी बने फिरते कहो फिर इश्क […]
जाने कहां और कितनी दूर चली, चलकर हिमालय की पर्वत श्रृंखला में पहुंच गई वहां पड़े पारस पत्थर को उठाया अर्ध निंद्रा में ही थी- सरोवर में बहते सुंदर नीले जल पर कमल की पंखुड़ियों […]
कभी झांक कर देख मेरी नजरों में हो जाएगा तू दीवाना। एक बार दिल में आकर तो देख आ तुझे मैं लबों से छू लूं तू कभी मेरा गीत बन कर तो देख।
मोहब्बत के सफर में एक नया आगाज़ कर देना मैं तुझसे दूर गर जाऊं तो फिर आवाज दे देना मैं लिखती हूं तुझे हर रोज अपने दिल के पन्नों पर कभी फुर्सत मिले तो उन […]
कागजी प्रेम,कागज़ के कुछ पन्नों तक ही सिमट कर रह जाता है। कुछ आंशिक शब्दों से शुरू होकर, आंशिक ही रह जाता है। विश्वास की डोर बड़ी कच्ची होती है प्रेम की मिठास बस जिस्म […]
आसमानी रंग में अब तो रंगी दुनिया नेह के दीपक तले जल रही तनहाईयाँ दूधिया रोशनी में सज रहा प्रियतम मेरी चुनरी ओढ़ कर पवन ले रही अंगड़ाइयां बारिश की बूंदों से दिल की सज […]
बचपन की नादानियां नसीब में अब हैं कहां वो मस्ती थी तभी तक दोस्त थे जब संग वहां कैसे तुम्हें बताऊं मेरे यार कितनी खुशी तूने मुझे दी है बुझते हुए चिराग को जैसे जिंदगी […]
कष्टों में कोई कमी न हो मेरे प्रभु पर उन्हें सहने की क्षमता भी तूं जब भी मुसीबतों से दबा मैं कभी अवाक था मुझे संभाले हुए था तूं नफरत पाली मैंने किसी के लिए […]
मेरा प्यार, बुजुर्ग का ज्ञान —————- किसी बुजुर्ग ने, एक सवाल पूछा, जिसका जबाब- उम्र भर ना दे पाऊगा, बेटा! ऐसा कौन सा ज्ञान हासिल किया है, जो आज उसकी बेटी ले के भागा है, […]
आकाश की बाहों में चुप जाने को जी चाहता है सूरज की गर्मी में तप जाने को जी चाहता है रात की दहलीज़ पर नंगे पांव रखकर चांद की चांदनी में नहाने को जी चाहता […]
अभिनय की इस परंपरा को मैंने अब तक खूब निभाया दिल के आंसू छुपा लिया और झूठी मुस्कान से सब को रिझाया बात बना ली, जख्म छुपाए रात-रात भर नींद ना आए चंदा से आंख […]
सुबक-सुबक कर निकल रहे हैं गम के आंसू ढलक रहे हैं कुछ गालों से रेंग रेंग कर कवि के मन को भिगा रहे हैं कुछ आंचल के छोटे टुकड़े में अपने अस्तित्व को छुपा रहे […]
इन बूढ़ी-सी झुर्रियों में जाने कितने राज़ हैं नजरों को है इंतजार और जाने कितने ख्वाब है उम्र की दहलीज पर बैठा तन का मेमना बूंद आंखों में छुपी है ह्रदय में जाने कितनी बरसात […]
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