बात कम हो काम अधिक तब तो है कुछ बात। ऐसा क्या प्रचार जो दिन को बोले रात। दिन को बोले रात रात को दिन कहता हो। तस्वीरों को खींच, दिखावा ही करता हो। कहे […]

बिल्कुल देर न कीजिये, भले काम में आप। होता जायेगा भला, खुद का अपने आप।। गणना करते ही रहा, पूँजी की दिन-रात। उम्र बिता दी धन कमा, समझ न आई बात।। यहीं रह गया सब […]

इस बेरंग सी जिंदगी में मानो, रंग जो आप भर रहे कल की इस कोमल कली को हाथ थाम कर सिखला रहे जब बाहें हो आपकी शाम सिरहाने रात की अंधियारी भी रोशन सी लगे […]

कविता-धर्म के ठेकेदार —————————— इस मुस्कुराहट में कौन सी जात छुपी है, चेहरे की कोमलता में कौन सा धर्म छुपा है, आज बता दो- धर्म के ठेकेदारों, इसके बालों को- कौन से भगवान ने बनाया […]

झील के आगोश में कल चाँद फिर ढ़लता रहा। एक सितारा चाँदनी में रात भर जलता रहा। रात भर इक शक़्ल मेरी आँख में पलती रही, रात भर अंगड़ाइयों का दौर फिर चलता रहा। हसरतों […]

बदलती ऋतुओं से बदल रहा है मन देखते इन नजारों को बाबरा हो रहा है तन बादलों के टूटने की लड़ी आ रही है वह तेज गड़गड़ाहट और चमकता आसमान देखने की घड़ी आ रही […]

साँझ इतनी मनोहर है गगन में सितारे हैं धरा में भी सितारे हैं, बड़े अद्भुत नजारे हैं, खड़ा हूँ पर्वत की चोटी में बने घर की छत पर, बह रही है हवा ठंडी, कभी है […]

हर एक की अपनी मजबूरी है पर उसको समझना जरूरी है। जरूरतें बहुत है, पर साधन सीमित है आकांक्षाओं की परिधि तो असीमित है। समझना पहले है, समझाना अगली कड़ी में शामिल है, बनाने वाला […]

एक छत है मगर अलग अलग कमरे है कही गम कही खुशी कही बेखबरी सभी अलग अलग चेहरे है कोई नही जानता रात किसकी कैसी थी कही हल्के कही गहरे काले घेरे है उसकी इजाजत […]

आया मौसम मानसून का बरसा है जल रात भर, लाया पानी कहाँ से इतना आसमान बादल में भर। सुबह-सुबह जल्दी उठ चिड़िया रोजगार की खोज में चूं-चूं करती दुबकी बैठी कुछ रुकने की आस में। […]

दो माह पूर्व ही विवाह हुआ था उसका किसी की नाजों से पाली गई बिटिया थी वह, कितनी प्यारी गुड़िया थी वह। अचानक पता चला उसका निधन हो गया है। न बीमार थी, न कोई […]

जब राहें कंटकित व वीरान हो, और कोई ना तेरे साथ हो, तब तुम व्यथित होना नहीं, हिम्मत मन की खोना नहीं, जब होता कोई पास नहीं, तब होता हैं वो आसपास कहीं, एहसास करो […]

प्याज तुम आँसू निकाल देते हो फिर भी भाते हो क्योंकि स्वाद बढ़ा देते हो। प्रेम तुम खुशियां भी देते हो, आँसू भी देते हो, लेकिन जिन्दगी की रौनक बढ़ा देते हो। प्याज की कई […]

प्रिय भैया लिवा ले जाओ न आकर तुम्हारी याद आती है यहाँ खुश हूं बहुत लेकिन मुझे खुशियां रुलाती है जबसे आई हूं रोती हु कमरा बंद कर करके कोई आता है तो होंठो में […]

हम भी एक महल बनाए है उलफत के सरज़मीं पे महफूज रहे मेरा महल इसीलिए वफा की चादर ओढा़या है हमने महल पे । देखें ज़ुल्म में कितनी ताक़त है जो महल को हीला दे […]

इन घड़ी वालों के पास वक़्त कहाँ है इनकी बातों में वो बात अब कहाँ है जिंदगी आसान करने के फंडे ढूंढते ढूंढते छप्पर तो अभी भी है, उठवाने वाले हाथ कहाँ है। इस अंधी […]

फूल बोने हैं भले कांटे उगें बागों में, जोड़ दें रिश्ते सभी नेह के धागों में। भाव लिखने हैं भले बेसुरे ही क्यों न हों, जिसको भायेंगे वही बांध लेगा रागों में। खोजने हैं जो […]

निपटना होगा विपरीत धारा से, तैरना होगा पार पाने तुझे। घुमाना चाहेगा, भंवर जब भी तुझे समझ तत्काल तूने खुद को संभालना होगा। कष्ट सबकी परीक्षा लेता है, जो डरा वो हार जाता है। निडर […]

“ख्वाहिश ना ऐसो आराम की, चाहत ना दौलतो के शान की, जरूरत तो है बस, खुद के पहचान की” हर एक के लिए उसका शान उसका अस्तित्व और पहचान जो कर न सके आप के […]

अब आ ही गए हो तुम तो दुश्मन की जरूरत ना रहेगी बैठे बैठे बहुत वक़्त गुजर गया लगता है अब फुरसत ना रहेगी नाम तुम्हारा भी सुना था बड़ा देखने की हसरत अधूरी ना […]

जब कोई जरिया मिलता नहीं ग़म छिपाने का। हमराज दिखता नहीं दर्द मिटाने का। बेचैनी हद से ज्यादा आसरा नहीं तकल्लुफ मिटाने का। बरबस मन की पीर अश्क बन छलक आती, है सौख नहीं आंसू […]

बीतता जा रहा है निरन्तर वक्त रुकता कहाँ है किसी को दिन उगा, दोपहर- रात फिर चक्र है यह घुमाता सभी को। चक्र चलता रहा है अभी तक पौध उगती रही और मिटती रही आने […]

आओ दो बोल सुना जाओ ना, गीत के बोल सुना जाओ ना। हो गए दिन बहुत सुना ही नहीं, अपने उदगार सुना जाओ ना। सूनी सूनी सी फिजायें हैं अब सारी मुरझाई दिशाएं हैं अब, […]

ये कोरोना कहां से आया? इसने हमको खुब सताया। कहीं भी आना जाना छुडवाया, बाहर का पीना-खाना छुडवाया। यार – दोस्त सब हुए पराये, किसको कितना फोन लगाये ? अकेले – अकेले बर्थडे मनाये, टीवी […]

ढूंढता है उन लम्हों को जहां सिर्फ अपनापन था अधिकार मां पर सिर्फ अपना नहीं दबाव किसी का था।। जहां हक था भाई से बातें करने की पिता से लाङ जताने की मां के आंचल […]

मनोहर शाम है छितरे हुए हैं व्योम में घन टपकती बूँद के अहसास से पुलकित हुआ तन। लग रहे हैं बहुत खुश पेड़-पौधे उग रहे हैं अनेकों बीज दे रहा भानु उनको ताप गगन भी […]

“बाल श्रम निषेध दिवस” —————— नन्हे सुमन हैं इनसे क्यों करवाते हो मजदूरी पढ़ने दो स्कूल में इनको ना करवाओ अब मजदूरी खिलेगे नन्हे पुष्प तो भारत का नक्शा बदलेगा इनके आगे बढ़ जाने से […]

सुकून!! तू मेरे पास कब होता है, तुझे ही मालूम है, या मुझे ही पता है, यही तो तेरी अदा है, जब मैं कर्तव्य पथ पर रमा होता हूँ, तब तू मेरे पास होता है। […]

जिंदगी की उलझनों से फुर्सत लेकर आओ बैठो मेरे पास कुछ पल••• दो आराम अपनी सांसों को बंद कर दो मुट्ठी में सितारों को ……जुगनू बिछा दो पैरों के तले आ पंख फैलाकर आसमान में […]

शठ शकुनि से कुटिल मंत्रणा करके हरने को तैयार, दुर्योधन समझा था उनको एक अकेला नर  लाचार। उसकी नजरों में ब्रज नंदन  राज दंड  के अधिकारी, भीष्म नहीं कुछ कह पाते थे उनकी अपनी लाचारी। धृतराष्ट्र विदुर जो […]

कर्तव्य पथ पर बढ़ चल ना फिकर कर जो मिले राह में मुश्किलें ना फिकर कर हौसला बुलंद रख किस्मत को मुट्ठी में बंद रख पुष्पों पर चलकर कभी नहीं मिलती है मंजिल याद रख […]

एक दिन यूं ही अनजाने में खाया था एक आम चूस कर उसकी गुठलियां फेंकी थी जमीन सूखी ही थी, फिर कभी बरसात हुई वो आम की गुठली पृथ्वी के गर्भ में समा गई, सावन […]

गीत – इश्क ए शैलाब | उफनते हुश्न ए शैलाब मुझे बहा न देना तुम | शराबी नजरों शबाब ए जाम डूबा न देना तुम | मै मरीज ए इश्क तेरा मर्ज ताजा ही रहेने […]

जब-तक सांस मेरे तन में रहे तेरे हाथों में हाथ मेरा हो हर उम्मीद जुङी हो तुमसे बस हर क्षण तेरा साथ हो।। उम्मीदों की सहर हो या ढलती उम्र की शाम हो समय का […]

बरसेगी धरती पे कब सावन के फुहार। बता ए घटा कब आएगी बसंत बहार।। मोर पपीहा भी मिलन के गीत गुनगुनाने लगे। मन के बगिया मे सैंकड़ों फूल खिलने लगे।।

होना था तेरा, पर तेरा होना ही सिर्फ मेरा पहचान नहीं | तू था जरूरी, पर एक जरुरी ख्वाब नहीं | सिर्फ तेरा होना ही, मेरा समान नहीं | ख्वाब मेरे ख्याल कई, मकसद और […]

सौंदर्य एक परम अनुभूति है, हमारे नेत्रों से आत्मसात होकर अन्तस तक जाता है। प्राकृतिक सौंदर्य हर मन को भाता है। काव्यगत सौंदर्य काव्य के गुण-धर्म से परिचित कराता है। विचारों का सौंदर्य व्यक्तित्व को […]

एक रास्ता है जो आपसे मिलाता है, है कठिन मगर वो ही आस को जगाता है। मन से मांगकर पाँखें तन में घौंप दी जायें उड़ चलूँ मिलूँ आकर ये उमड़ पड़ी चाहें। या मन […]

रूठ जाते हैं जब कभी सब अपने जिंदगी परेशान करती है भटक जाते हैं जब राही अपनी मंजिल जिंदगी इम्तिहान लेती है बिखरते हैं जब सपने अपनों की नजरें ही हैरान करती है नहीं दिखता […]

क्यूं बदल गया परिवेश, बदल गए रिश्ते, आधुनिकीकरण के दौर में, फरेबी हो गए रिश्ते, झूठी आन बान शान, पैसे की ताकत पर झुकते रिश्ते, इसकी अंधी चाहत ने, खोखले कर दिए रिश्ते, एक समय […]

लता-बेल -सी माता होती, होते पिता बटवृक्ष महान। ठंढी मीठी सघन छांव में पलते जिनके सब संतान।। देकर जन्म ब्रह्मा कहलाए पालन कर बिष्णु बन जाए। हरण करे अज्ञान तिमिर संहारक रुद्र रूप बड़ भाए।। […]

हम तुम पले बढ़े अपने ही देश की छाँव में। फिर क्यों दरार पड़ी आज अपने ही विचार में।। अपनी इनसानियत को तो चंद सिक्के में बेच दिए। ममता को गिरवी रख कर हैवानियत के […]

तेरी कल्पनाओं का कायल हुआ जाता हूँ भावनाओं में तेरी बहता-सा जाता हूँ शब्द तुम्हारे फूटते हैं अंकुरित होकर तेरी स्मृतियों में खोया सा जाता हूँ दोपहर में तू घनी छांव सी है प्रज्ञा’ तेरी […]

” मन की पीड़ा को आपके सामने ला रही हु अपने वाणी को प्रस्तुत करने जा रही हु ” मैं रूकती नहीं उन इरादों से, जो कैद कर सके मेरे पाउ । मैं भारत वर्ष […]

खुशियों के रंग फैलाओ बिखरा दो तुम पुष्पों को नए नवेले पंख लगाकर सच कर दो तुम स्वप्नों को चित चंचल है नयन बिछाए देख रहा है अम्बर में चाँद को शायद लाज़ आ गई […]

भोजपुरी पर्यावरण गीत – पेड़वा बिना | जइसे तड़पेले जल बिना मछरी ना हो | तड़पे छतिया धरती पेड़वा बिना | गावे ना गोरिया सावन बिना कजरी ना हो | सतावे बरखा रतिया गोरी सजना […]