सुन्दर तेरी रचना अति सुन्दर तेरी रचना विधाता रंग बिरंगी सृष्टि रची, जा में नाना तरह जीवजाति बसी। नाना तरह की, विविध तरह जीवन ज्योति जगी। अति सुन्दर तेरी रचना विधाता, कल-कल करती नदिया-झरने वन-उपवन, […]
सुन्दर तेरी रचना अति सुन्दर तेरी रचना विधाता रंग बिरंगी सृष्टि रची, जा में नाना तरह जीवजाति बसी। नाना तरह की, विविध तरह जीवन ज्योति जगी। अति सुन्दर तेरी रचना विधाता, कल-कल करती नदिया-झरने वन-उपवन, […]
कुछ गलतफहमियां पाल ली तुमने हमें लेकर गलत धारणा बना ली हम बुरे हैं भले हैं जैसे भी हैं बस तुम्हारे हैं किसी और की आली क्यों मान ली तुमने।।
होली का त्यौहार है, रंगों की बौछार है, कहिए आपका क्या हाल है हर ओर गुलाल ही गुलाल हैl रंग बरस रहे हैं इस बार, बीते बरस ना आई यह बहार l कोरोना के कारण […]
भोजपुरी गजल- पागल के बीमारी बा | केहु से प्यार ना मतलब क सब यारी बा | रिश्ता नाता ला पता पईसा सभपर भारी बा | भाई भाई से मीठ ना बोले मुंह फेर चलेले […]
मेरे गीतों में बह आई, रंग भरी नव सरिता, खूब बहारें भरकर गाई, रंग भरी यह कविता। खूब अबीर गुलाल उड़ायें, गायें और बजायें। जीवन की सारी उलझन को, आओ दूर भगायें। खुश रहना ही […]
जय श्री सीताराम ————————— सब पे कृपा करते हैं राम सबका जीवन सँवारते हैं राम जिसका न कोई संगी न साथी उसका सहायक है राम ।।1।। ———————————- जगत का आधार हैं राम सृष्टि के कण-कण […]
मेरे राम इतना तु कर दे मुझ पे एहसान कि तेरा नाम जपूँ मैं बार-बार ।।2।। ———————————————- मेरे राम इतना तु कर दे मुझ पे एहसान कि तेरा नाम जपूँ मैं बार-बार ।।1।। ———————————————— तेरे […]
जो सुख है ब्रह्मचर्य में, वो सुख नहीं है, दुनिया के झमेले में । ——————————— रीढ़ की हड्डी टूट जाती, बुढ़ापा आने से पहले . कमर की पसलिया कहती रे मूरख कामी लाठी पकड़ ले […]
जब तेरा सानिध्य मुझे मिल ही रहा है राम तो क्यूँ जाये हम दुसरों के द्वार — 2 —————————————— जब तेरा सानिध्य मुझे मिल ही रहा है राम तो क्यूँ जाये हम दुसरों के द्वार […]
गाली न दे मुझे आली नहीं मारी तुझे पिचकारी मैंने मारी नहीं पिचकारी, भर कर रंग, चला कुंज गलियन, मारी नहीं पिचकारी। शायद तुझको भूल हुई है या यह मेरी राह नई है, मगर यही […]
किसका गुमान हैं तुम्हें क्या जायेंगे संग तेरे -2 ——————————– किसका गुमान हैं तुम्हें क्या जायेंगे संग तेरे ।।1।। ——————————— जो कमाया है तु मर-मर के वो चुकाना पड़ेगा, तुम्हें रो-रो के एक-एक वक्त, एक-एक […]
सौ दीप जला लो मंदिरों में चाहे हजारे दीये जल तेरे आँगन में जब तक मन की तम ना होंगे दूर तब-तक है तेरे सारे दीये की रौनक सून ।। ———————————————- एक दीप जलाओ ऐसा […]
पावक उग आ तू मेरे मन में, भस्म करूँ खामियाँ स्वयं की, एक- एक कर खोज -खोज कर दुर्बलताएँ दूर करूँ निज। बहुत हो चुका डगमग डगमग अस्थिर मन अस्थिर तन लेकर भटक रहा जो […]
लब खुलें तो सत्य बोलें अन्यथा पट बन्द हों, ईश ऐसी शक्ति देना, भाव में नव छन्द हों । याचना है ईश तुझसे, काम से मतलब मुझे हो, और राहों और बातों से नहीं मतलब […]
पावस बहती आंखों में तुम नीर-सा बनकर आए अविरल बहते रहे हृदय में कितने छाले उभर आए किंकर्तव्यविमूढ़ बने हम तेरा साथ पाकर के जो बन पाने को आतुर थे वह ना हम बन पाए […]
एक सुनहरी धूप थी तुम ओ सखी ! पर गैर की टुकड़ी में तुम जा मिल गई । ना सोच पाई मैं ना संभल सकी बस अकेली थी अकेली रह गई ।।
खोजता मन है खिलौना आसमां छत धरा बिछोना गेहूं की बाली सी कोमल और स्वर्ण सी जटाएं बोलती मिश्री हैं मन में काली-काली ये फिजाएं धुंध छाए आसमां पर कौंध बिजली की उठी लिपटकर स्वर्ण […]
आ बैठ पास मेरे ओ याद! भूली बिसरी, आ अश्रु! नैन में आ या मुँह में आ जा मिश्री। बीते पलों की खुशबू तू उड़ कहाँ गई है, ओ मन की लालसा तू धुल कहाँ […]
मन बना पाहन न कारण है पता, तोय के धोए से केवल धुल गया। फिर मरुत से भाप बनकर उड़ गया, राज भीतर का वो भीतर रह गया। यामिनी भीतर ही बैठी रह गयी, दामिनी […]
आजकल सो पा रहा है वह जरा फुटपाथ पर, ठंड कम लगने लगी ठिठुरन हुई कम आजकल। बीते दिन जाड़ों में रोया रात भर सिकुड़ा सा सोया बच गया बस जैसे-तैसे सोच मन में खूब […]
बालों में लगे रबर की तरह खिंचे चले जा रहे तो तुम, खिंच रहे हो मगर बांध रहे हो सभी को एकजुट, जिससे निखर रही है चोटी, एकजुटता से ही हम छूँ सकते हैं चोटी, […]
खूब बातें हो गई हैं, अब लगो उत्थान में, देश आशा में लगा है, मत चलो अवसान में। खूब दूजे पर उछाला कीच अब रहने भी दो, एक दूजे को समन्वित बात तुम रखने भी […]
जीवन में सद्कर्म कर सकूँ, यह शक्ति तू दे मुझे, झूठ को नित करूँ उजागर, यह शक्ति तू दे मुझे। गा सकूँ खुले मन से गाने, उल्लास भाव अपना, हे ईश! मुझे वर देना तुम, […]
जल, ढूंढते रह जाऐंगे प्यासा कौवा जुगाड़ से, पानी ऊपर ला रहा। जल की कीमत मूक पक्षी, वास्तव में पहचान रहा।। हम मनुष्य दिमाग वाले, व्यर्थ जल बहा रहे। लापरवाही की हद, से भी ऊपर […]
भोजपुरी पूर्वी होली गीत- कान्हा मारे पिचकरिया | कान्हा मारे पिचकरिया ये सखिया बदनवा भिंजेला मोर कन्हईया जी खेले ले होरिया चुनरिया रंगी देले मोर | आवा आवा सब सखिया सुना सब बतिया मोर घेरी […]
निद्रा में था रात भर, उठूँ धरूँ अब ध्यान, मात-पिता गुरु देव का, अभिवादन सम्मान, अभिवादन सम्मान, बड़ों का करूँ पूज लूँ, ले उनसे आशीष, राह में कदम बढ़ा लूँ। कहे कलम आशीष, एक अनमोल […]
इतना मजबूर सा कोई हो तो कैसे आईने शक्ल बदले हर रोज जैसे शायद उम्र का नया सा पड़ाव हो या फिर बीते पल का हिसाब हो नहीं तो राजनीति का झुकाव हो वरना दमदार […]
ले खुशी के रंग सबको, रंग देना सीखिये, रंग उनका रंग अपना, मिल सके यह कीजिये। रंग मन में रंग तन में, रंग जीवन सींचिये, बेरंग जीवन जूझते , रंग उनको दीजिये। दर्द में डूबे […]
तुम मेरी भावनाओं का अनुवाद हो तुम मेरी आकांक्षाओं का आकार हो साकार होगा हर स्वप्न मेरा गर तुम जो मेरे साथ हो तुम्हारे स्वप्न मेरे स्वप्नों के बिम्ब हैं तुम हमारे हम तुम्हारे प्रतिबिम्ब […]
असम्भव है तुम्हें परिभाषा के दायरे में बांधना.. तुम हो वो सागर, जिसमें विलीन होता है व्याकुलता का दरिया.. या निष्प्राण मन के भीतर बसी नीरवता को चीर के उपजी स्नेहमय अनुगूँज..!! एक बजंर हृदय […]
फ़ागुन में एक गीत सुनाऊँ, आओ तुम्हे मन-मीत सुनाऊँ। दिल में है जो प्रीत सुनाऊँ साँझ हो चली दीप जलाऊँ। चादर ओढ़े लालिमा की, साँझ सुहानी जाने लगी है। दीपक की रौशन लौ से, एक […]
गजल – इस पार या उस पार | जो चाहो वो मिल जाये ऐसा होता नहीं | हार कर भी कोई लड़ता मगर रोता नहीं | मिल जाती मंजिल यूं ही पा लेते सभी | […]
आज की नारी, सीमित नहीं है घर की चार दिवारी तक। तन से कोमल मन से सशक्त है नारी … निभाए दोहरी ज़िम्मेदारी। शिक्षा, चिकित्सा का क्षेत्र हो, या हो फिर विज्ञान। आज की नारी […]
प्री बोर्ड की परीक्षा का, परिणाम जब आया उसने अपेक्षा से कम ही अंकों को पाया। “क्यों अंक अच्छे नहीं आए हैं तेरे” वह खाता था डाँट पिता से साँझ और सवेरे। रोज़-रोज़ की डाँट […]
नैना मूंद मूंद जा सोना नहीं वे सोना नहीं काटे जग बैरी तो रोना नहीं वे रोना नहीं किस जहाँ में ले आ गयी है हवाएँ इस जहाँ में होते हैं अपने पराये मतलब की […]
सब कुछ सिखा देगा इंटरनेट मगर संस्कार तो घर से ही सीखने होंगे, छोटे बच्चों को खेल लगाना, उनकी चाहत को पहचानना, उनकी भूख-प्यास का अहसास ये सब तो सीखने ही होंगे। बुजुर्गों का अदब, […]
खिल गई है सुबह जाग जा अब पथिक हाथ-मुँह धो ले, न कर आलस अधिक। काम पर लग गई है दुनिया चींटीं से लेकर हाथी तक अपना चुके हैं, मेहनत का पथ। उड़गन भी नित्यकर्म […]
जो दान भूखे को दे सकेगा असल में सच्चा धनी वही है, जमा किया बस जमा किया तो वो सच में कुछ भी धनी नहीं है। कमाओ लाखों करोड़ों चाहे, जरा सा उसमें से दान […]
दर्पण कब खुद सजता है, दर्पण के आगे हम सजें। चाँद रहता है गगन में, पर मुझे लगे उतरे मेरे आँगन में हर रात को जब मैं सो जाऊं, वो रजत छिड़कने आ जाए तारों […]
तू रंग कैसा लगा गया है मुझ में तो मधुमास सा आ गया है। ये पीले-पीले व लाल फूलों से मेरा तन-मन सजा गया है। खिला के भीतर के फूल मेरे रंगों का उपवन सजा […]
अगर मैं रूठूँ मुझे मनाना, अगर मैं टूटूँ मुझे उठाना, सहारा मेरा बने मैं तेरा, यही तो जीवन का है फ़साना। अगर है दूरी तो पास लाना, जरा सा मनुहार से बुलाना, मीठी सी लोरी […]
जो राह सच्ची चलेगा मित्रों भले ही गाली वो लाख खाये मगर है ईश्वर का न्याय ऐसा, हमेशा सच ही सैल्यूट पाये। कभी भी जीवन में तुम किसी का बुरा न करना, बढ़े ही जाना, […]
तू टिमटिमा मत चमकते तारे बिना रुके रोशनी दिखा दे, अंधेरा घनघोर सा घिरे जब तू कर उजाला मुझे सिखा दे। चलूँगा कैसे अंधेरी राहें, मुझे तू सारी कला सिखा दे, मनाने प्रीतम को क्या […]
ये गुनगुनाहट कहाँ हुई है जो लेखनी ने बयान की है, जो ध्वनि सुनी थी कभी मुहोब्बत की आज फिर से सुनाई दी है। निगाहों से मिलने को निगाहें पलक झपकते मिला ही दी हैं। […]
पता नहीं कहाँ खो गई, वह छोटी सी प्यारी सी चिरैया। फिर से खेलने, फुदकने को, आँगन में आओ प्यारी गौरैया। किस की बुरी नजर है तुम पर, यह हमको बतलाओ। चीं-चीं चूँ-चूँ करने को, […]
इतना आसान नहीं होता किसी अपने से बिछड़ जाना जलाना हर रोज दिल को पड़ता है। याद आती है उसकी रह-रह कर फिर भी भूल जाना पड़ता है। भूल जाने की जद्दोजहद में दिल के […]
आज आसमान छूने को जी चाहता है मेरा, मगर यह दिल रोक लेता है। क्योंकि आसमान पाने की ख्वाहिश में कुछ अपने छूट जाएंगे।।
गौरैया, जाने कहाँ उड़ गई तुम अपने मखमली परों में बाँध के वो सुबहें, जो शुरू होती थी तुम्हारी चहचहाहटों के साथ और वो शामें, जब आकाश आच्छादित होता था तुम्हारे घोसलों में लौटने की […]
बाजार में प्रविष्ट करते ही छोटे-छोटे बच्चे पीछे लग जाते थे, बाबू जी दे दो, माताजी दे दो, भैया जी दे दो, दीदी जी दे दो। स्कूल का समय होता लेकिन वे माँग रहे होते। […]
अभिलाषा और ईर्श्या में, रात-दिन सा अंतर जानो तुम। अभिलाषा मजबूत रखो, ईर्श्या से दिल ना जलाओ तुम।। चादर जितने पांव पसारो, पांव अपने ना कटाओ तुम।। अपनी मेहनत से चांद पकड़ो, उसे नीचे ना […]
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