मिलन

तुमसे मिलने की ललक..
मेरी इन साँसों को !
एक उम्मीद-औ-आशा
की झलक दे जाती है !!

तेरी बस एक झलक..
उम्मीदों के तप्त मरुस्थल में !
उमंगों की बहार..
अनेकों पुष्प खिला जाती है !!

यूँ तो तुम बसते हो..
मेरे कण कण में !
तेरे दीदार की ख्वाहिश..
नयी प्यास जगा जाती है !!

राज़-ए-दिल तुझसे..
भला कौन छुपा पाया है !
दिल की हर धड़कन..
तेरा अहसास करा जाती है !!

बेख्यालि में भी..
ख्यालों में सूरत तेरी है !
सांसो की तरन्नुम..
“सो-हम” लय में गुनगुनाती है !!

***********
deovrat – 21.02.2018 ( c)

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

By DV

10 Comments

  1. Priya Gupta - March 8, 2018, 5:56 pm

    Nice… specially this line बेख्यालि में भी..
    ख्यालों में सूरत तेरी है !

    • DV - March 9, 2018, 4:53 pm

      Thanks Priya … your comments and liking to the write really meant to me

  2. Yogi Nishad - March 9, 2018, 1:22 pm

    वाहहहहह लाजवाब बेहतरिन

    • DV - March 9, 2018, 4:52 pm

      I am thankful of your valuable time spared for the reading.. Thanks a lot

  3. Ritu Soni - March 10, 2018, 11:08 am

    very nice poem

    • DV - March 10, 2018, 12:33 pm

      Thanks Ritu for sparring your time and comments

  4. राही अंजाना - July 31, 2018, 11:15 pm

    Waah

    • DV - September 12, 2019, 12:55 pm

      Thanks Rahi sab, for sparring your time and comments

  5. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 11, 2019, 10:31 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

    • DV - September 12, 2019, 12:56 pm

      Thank you so much Mahesh ji for beautiful comments

Leave a Reply