सपना

सपना

काश सपना मेरा ये हकीकत हो जाए,
मैं बाहर और तू यूँही अंदर हो जाए,
रख कर बर्तन में तुमने मुझे बहुत सताया है,
अब तुमको भी सताने की कुछ खुरापात हो जाए,
खेले हो खेल तुम मुझे फंसाकर साहिब,
अब तुमको फांस कर भी एक खेला हो जाय, काश ये सपना मेरा हकीकत हो जाए तो कैसा हो जाए॥

राही (अंजाना)

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इलज़ाम

सरेआम रक्खे हैं।

बैठी है

बैठी है

जवाब माँगता है

6 Comments

  1. Puneet - January 27, 2017, 4:21 pm

    लाजवाब।।।।।

  2. Kirti - January 27, 2017, 4:46 pm

    behad sundar kavita

  3. Neha Saxena - January 28, 2017, 3:50 pm

    Kya kehne

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